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आगरा में 500 बंदर होंगे जिला बदर, बंदरों की शामत आयी

आगरा। ताजनगरी को बंदरों की समस्या से निजात दिलाने के लिए वाइल्ड लाइफ एसओएस की मंकी कैचर यूनिट को लगाया गया है। जिसने आज से औपचारिक रूप से अपना काम शुरू कर दिया। पकड़े गये बंदरों को फरह, मथुरा स्थित बंदर संरक्षण गृह में रखा जाएगा।

बंदर

बंदरों का आतंक इतना अधिक है कि रिहायशी इलाकों में वो बे-रोकटोक घूमते हैं क्योंकि लोग धार्मिक आस्था के चलते उन्हें खाने-पीने की चीजें डालते रहते हैं। लोगों की ये आदत बंदरों के लिए वरदान साबित हो रही है लेकिन दूसरे लोगों के लिए मुसीबत बन गई है क्योंकि खाने का सामान न मिलने पर बंदर लोगों को निशाना बना रहे हैं।

समस्या के समाधान की मांग लम्बे समय से उठ रही थी लिहाज इसके निस्तारण के लिए प्रशासन ने वाइल्ड लाइफ एसओएस एजेंसी के साथ मिलकर एक प्रोजेक्ट की शुरुआत की है जो कि प्रोटोटाइप के तौर पर शुरू की जाएगी।

बंदर का वैक्सीनेशन व टैटू

मंगलवार को मंडलायुक्त कार्यालय पर मंकी कैचर यूनिट का फीता काटकर शुरुआत की गयी। पहले चरण में शहर के करीब आधा दर्जन स्थानों को चिन्हित किया गया है जहां से बंदरों के दर्जनों ट्रूप्स को एक-एक कर पकड कर उनका वैक्सीनेशन करने के बाद उन्हें टैटू बनाकर सुरक्षित किया जायेगा। पहले चरण में वन विभाग ने 500 बंदरों की नसबंदी करने की मंजूरी दे दी है।

लिहाजा प्रोजेक्ट को सफल करने के लिए मार्च 2016 तक इस काम को पूरा करने की कोशिश की जाएगी। संस्था ने यह भी बताया कि बंदर किस तरह से पकड़े जाएंगे और फिर कैसे उन्हें संरक्षण  गृह में भेजा जाएगा। कलेक्ट्रेट और उसके आसपास बंदरों के कई झुंड रहते हैं। वाइल्ड लाइफ एसओएस की टीम के एक सदस्य ने बताया कि बंदर के बच्चों को अलग रखने के लिए पिंजरा बनाया जा रहा है। जरूरत के मुताबिक बंदरों को पकड़ने का दूसरा चरण भी चलेगा।

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