आगरा: हाइटेक के जमाने में यह हाल

Agra

आगरा। दुनिया इक्कीसवीं सदी की तरफ तेजी से भाग रही है। सभी संस्थान खुद को हाईटेक करने मे जुटे हैं लेकिन डॉ भीमराव अम्बेडकर यूनिवर्सटी को शायद इन सबसे फर्क नही पड़ता। तभी तो बुधवार को पूरे दिन अधिकारियों ने इमरजेंसी लाइट और छात्रों के फोन की टार्च की रोशनी में काम किया। इन हालातों को देखकर पहले तो छात्र-छात्राएं ठिठके लेकिन अपनी समस्याओं के निस्तारण के लिए वे अंधेरे कार्यालय मे जूझते नजर आये।

ये है डॉ भीमराव अम्बेडकर विवि का नजारा
न जेनरेटर और न ही व्यवस्था। कैसे सुधरेंगे हालात। जी हां ये नजारा है प्रदेश के सबसे पुराने विवि में से एक डॉ भीमराव अम्बेडकर विवि का। बुधवार को विवि का नजारा देखकर हम क्या जो भी यहां आया वो पहले ठिठका जरूर क्योंकि विवि रजिस्ट्रार कार्यालय मे घुप्प अंधेरा था लेकिन रजिस्ट्रार की मेज पर एक इमरजेंसी लाइट जल रही थी जिससे थोडी लाइट आ रही थी और टेबल के इर्द-गिर्द तमाम छात्र अपनी फोट की टॉर्च ऑन करके खड़े थे ताकि रोशनी को बढाया जा सके।
इस रोशनी मे विवि के डीआर परीक्षा और उनके साथी डीआर छात्र-छात्राओं से घिरे बैठे थे और एक एक कर उनकी समस्याओं का निस्तारण करा रहे थे। साथ ही जो भी छात्र प्रार्थना पत्र लेकर आता उससे उसके फोन की टार्च ऑन कराकर उसकी रोशनी मे उसकी समस्या का समाधान किया जाता।स कारण छात्राएं अंधेरे और भीड़ मे आने से कतरा रही थी लेकिन समस्या के निस्तारण की उम्मीद मे वे भी वे-मन से भीड़ मे ड़री सहमी सी नजर आ रही थीं।

लोकल फॉल्‍ट को बताया कारण

स सारे मामले पर विवि अधिकारी से बात की तो उन्होंने बताया कि विवि की लाइट फॉल्ट के कारण कटी हुई है और सुबह से लेकर शाम तक इसी हालात मे अधिकारियों ने छात्रों की समस्याओं को निस्तारित किया लेकिन जेनरेटर की व्यवस्था होना तो दूर विवि प्रशासन रजिस्ट्रार कार्यालय मे प्रकाश का कोई इंतजाम नही कर सका। डीआर भी व्यवस्था पर कहते दिखे कि किया किया जा सकता है..
के एन सिंह- विवि डीआर परीक्षा
हालात ये थे कि छात्र घुप्प अंधेरे मे जैसे तैसे अधिकारियों तक पहुंचने की जद्दोजहद कर रहे थे लेकिन छात्राओं की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी। कई छात्राओं को अभद्रता का भी सामना करना पड़ा लेकिन विवि प्रशासन सुबह से लेकर शाम तक लाइट की व्यवस्था को दुरूस्त नही कर सका और शाम तक ये दोनों अधिकारी अंधेरे मे यूंही आश्वासन के सहारे छात्रों को शांत कराकर भेजते रहे।

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