चीफ जस्टिस का छलका दर्द: जजों के लिए किसी के पास वक्त नहीं

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नई दिल्‍ली। पीएम मोदी ने स्‍वतंत्रता दिवस की 70वीं वर्षगांठ पर देश को संबोधित किया। पीएम मोदी के भाषण देने के बाद चीफ जस्टिस ने अपनी भड़ास निकाली। आजादी की 70वीं वर्षगांठ पर चीफ जस्टिस ने पीएम मोदी के भाषण पर नाराजगी जताते हुए कहा कि पीएम के भाषण में जजों के लिए कोई स्थान नहीं था।

आजादी की 70वीं वर्षगांठ पर चीफ जस्टिस

आजादी की 70वीं वर्षगांठ पर चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर का बयान

चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने हैरानी जताते हुए कहा कि हमने पॉपुलर प्राइम मिनिस्टर का भाषण डेढ़ घंटा सुना और लॉ मिनिस्टर साहब का भी सुना, मैं ये उम्मीद कर रहा था कि जजों की नियुक्ति के बारे में बात होगी।

दस साल में भी नहीं हो रहा फैसला

टीएस ठाकुर ने कहा कि अंग्रेजों के वक्त में तो दस साल में मुकदमे का फैसला हो जाता था। वो अब नहीं हो रहा। अब तो केस इतने बढ़ गए, मुकदमे इतने बढ़ गए और लोगों की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं। बहुत मुश्किल हो रहा हैं, इसलिए मैंने बार-बार गुजारिश की हैं कि जरा इस और भी तवज्जो दीजिए।

आज हम हिंदुस्तानी में बात करें

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया पहले भी जजों की नियुक्ति के मुद्दे को पीएम मोदी के सामने उठा चुके हैं। अपने भाषण की शुरूआत में उन्होंने कहा कि मेरे सारे अजीज दोस्त जो मुझसे पहले बोले, वो सब अंग्रजी मे बोले। मुझे लगता हैं कि आज का दिन कम से कम ऐसा है, जब हम हिंदुस्तानी में बात करें तो अच्छा है।

15 अगस्त की अपनी अहमियत

आजादी की 70वीं वर्षगांठ पर चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने कहा कि मैं ये मानता हूं कि जो भी त्योहार मनाया जाता हैं, उसकी अपनी एक अहमियत होती है. पंद्रह अगस्त के दिन की भी अपनी खासियत है। हमें उस अहमियत को कमजोर नहीं करना चाहिए। आजादी के वो सिपाही जिन्होंने कुर्बानी दी, जेल की यातनायें सहीं, उनको याद करने का दिन हैं।

कुर्बानी ना भूलें

चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने कहा कि आपको याद हैं, 1948 जब पाकिस्तान का हमला हुआ, हजारों लोग कुर्बान हुए, कश्मीर को आजाद रखने के लिए. बहुत कुर्बानी दी। 65,71, कारगिल के युद्द में कुर्बानी दी। आज भी जहां उग्रवाद है, वहां भी हमारे फौजी, पैरामिलेट्री के जवान लगे हुए हैं, उन्हें भी नहीं भूलना चाहिए।

गरीबी और बेरोजगारी पर चीफ जस्टिस का रुख

1947 में हमारी आबादी 32 करोड़ थी। 10 करोड़ लोग तब भी गरीबी रेखा के नीचे थे। करीब एक तिहाई लोग गरीबी रेखा के नीचे थे। आज हमारी आबादी 125 करोड़ हो चुकी है। वही दस करोड़ की आबादी 40 करोड़ के पास हो गई है। जरा उन पर भी ध्यान दीजिए, लेकिन आपने गरीबी रेखा भी ऐसे ड्रा की है कि 26 रुपये गांव में और 32 रुपये शहर में कमाने वाला शख्स गरीबी रेखा से ऊपर चला जाता है। एक बड़ी चुनौती ये है कि क्या हम 70 साल बाद गरीबी को हटा पाए हैं। आज रोजगार की परेशानी है। आज अगर मैं सुप्रीम कोर्ट में चपरासी के लिए वैकेंसी दूं तो पोस्ट ग्रेजुएट भी अप्लाई करते हैं।

अब कहने में कोई हिचक नहीं: टीएस ठाकुर

आजादी की 70वीं वर्षगांठ पर चीफ जस्टिस ने कहा कि मैं कोर्ट के बाहर भी और कोर्ट के अंदर भी बड़ी बेबाकी से बोलता हूं, क्योंकि मुझे लगता हैं कि मेरी जिंदगी का जो सबसे ऊंचा स्तर हैं, मैं वहां पंहुचा हूं। इससे आगे मुझे कहीं नही जाना, इसलिए मुझे किसी चीज की परेशानी नहीं है और न ही कोई हिचक है। सही बात आपके दिल को छुएगी और यही मेरी ताकत भी हैं।

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