आडवाणी की पत्नी की अस्थियों पर लगे पेड़, हुआ बवाल

0

आडवाणी की पत्नीऋषिकेश। बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की पत्नी की मौत के बाद आधी अस्थियों को ऋषिकेश ले जाने के मामले में स्वामी चिदानंद मुनि के खिलाफ मुक़दमा दर्ज कराया गया है। परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद मुनि पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाते हुए युवा तीर्थ पुरोहित महासभा के अध्यक्ष उज्ज्वल पंडित ने प्रथम अपर सिविल जज जेडी हरिद्वार की अदालत में याचिका दायर की है। इस पर सुनवाई तीन मई को की जाएगी।

आडवाणी की पत्नी की अस्थियों पर मुनि ने लगाया पेड़

रविवार को आडवाणी की पत्नी की अस्थियां हरिद्वार में गंगा में विसर्जित की गई थी लेकिन कुछ अस्थियों का विसर्जन नहीं करके लालकृष्ण आडवाणी और उनका परिवार परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद मुनि के साथ ऋषिकेश ले गए थे।

ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन आश्रम में बची हुई अस्थियां जमीन में डालकर उनके ऊपर पौधे रोंपे गए। इससे पुरोहित समाज काफी गुस्सा है। अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के अध्यक्ष उज्जवल पंडित ने मंगलवार को अपने अधिवक्ता अरुण भदौरिया के मार्फत स्वामी चिदानंद मुनि पर यह आरोप लगाते हुए याचिका दायर की कि वह ही कमला आडवाणी की आधी अस्थियों के साथ आडवाणी परिवार को अपने साथ ले गए।

आडवाणी की पत्नी की अस्थियां ऋषिकेश ले जाने का किया विरोध

पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की पत्नी की अस्थियां ऋषिकेश ले जाने के खिलाफ अखिल भारतीय युवा तीर्थ पुरोहित महासभा ने हरकी पैड़ी पर स्वामी चिदानंद मुनि के खिलाफ प्रदर्शन किया। आरोप लगाया कि वे लगातार हरकी पैड़ी और गंगा की मर्यादा तारतार कर रहे है। महामंत्री सुमित श्रीकुंज ने कहा कि भगवाधारी धर्माचार्य मर्यादा तोड़ रहे हैं। 2012 में चिदानंद ने सौगंध ली थी कि वे हरिद्वार वासियों की आस्था को आहत नहीं करेंगे। वह शपथ झूठी साबित हुई।

पौधों को बना रहे हैं मांसाहारी

हरकी पैड़ी प्रबंधकारिणी संस्था गंगा सभा के महामंत्री रामकुमार मिश्रा ने कहा कि मुनि महाराज ने शाकाहारी वृक्षों को भी अस्थियां डालकर मांसाहारी बना दिया है। यह महापाप है। गंगा का आगमन अस्थियों के लिए हुआ है और प्रतिदिन हजारों यात्री हरकी पैड़ी अस्थि प्रवाह करते हैं। प्रयाग आदि अन्य तीर्थों पर भी गंगा में अस्थियों डाली जाती हैं। चिदानंद मुनि का यह कहना सरासर गलत है कि गंगा में अस्थि विसर्जन बंद कराने के लिए अस्थियों पर पेड़ लगाने का विकल्प खोजा गया है। उन्होंने कहा कि गंगा अनादिकाल से अस्थि प्रवाह होता आया है और होता रहेगा। अस्थियां ऋषिकेश ले जाने पर अखिल भारतीय युवा तीर्थ पुरोहित महासभा ने भी इसपर नाराजगी जताई है। संस्था की बैठक में स्वामी चिदानंद की निंदा की। महासभा के महामंत्री सुमित श्रीकुंज ने कहा कि चिदानंद हरकी पैड़ी अस्थि प्रवाह बंद कराना चाहते हैं। उन्होंने पिछले कुछ वर्ष से अपने आश्रम में अस्थि प्रवाह शुरू करा दिया है। यह कृत्य राजा भगीरथ और कपिल मुनि का अपमान है।

loading...
शेयर करें