आदर्श घोटाला : बेनामी फ्लैट मामलों की सघन जांच का आदेश

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मुंबई| विवादास्पद आदर्श सोसाइटी में बेनामी फ्लैटों के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच रिपोर्ट पर असंतोष जाहिर करते हुए बम्बई उच्च न्यायालय ने बुधवार को एजेंसी को आगे जांच करने का आदेश दिया। सीबीआई की जांच रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद न्यायमूर्ति ए.एस.ओका और न्यायमूर्ति ए.ए.सैयद की खंडपीठ ने कहा कि वे संतुष्ट नहीं हैं। अदालत ने एजेंसी से आगे जांच कर 16 दिसम्बर तक रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।

आदर्श घोटाला

आदर्श घोटाला मामले में आई जांच रिपोर्ट से खुश नहीं है सीबीआई

पहले 2 सितम्बर को जब सीबीआई ने रिपोर्ट पेश की तो अदालत ने इसे स्वीकार करने से मना कर दिया और कहा कि सोसाइटी के खिलाफ दायर जनहित याचिका में उठाए गए अनेक मामलों में एजेंसी ने अपने दिमाग का इस्तेमाल नहीं किया है।

सामाजिक कार्यकर्ता प्रवीण वातेगांवकर की ओर से दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि बड़े नौकरशाहों और राजनीतिक नेताओं ने नियमों का उल्लंघन कर आदर्श सोसायटी की फाइलों को निपटा दिया और बदले में सोसायटी में बेनामी फ्लैटों के मालिक बन बैठे।

वातेगांवकर ने कहा कि जांच के शुरुआती दौर में सीबीआई ने साल 2011 में सोसायटी के एक प्रवर्तक कन्हैयालाल गिडवानी को गिरफ्तार किया था और उसकी हिरासत की मांग की थी, क्योंकि उसके पास दो राजनीतिक नेताओं के बेनामी फलैट हैं।

जनहित याचिका के अनुसार, गिडवानी और उसके परिवार के पास कुल दस बेनामी फ्लैट हैं और उसके स्वामित्व या वित्त पोषण के स्रोत अब भी अस्पष्ट हैं।

प्रमुख आरोपियों में एक गिडवानी की मौत साल 2012 में हृदयगति रुकने के कारण हो गई थी।

वातेगांवकर ने अपनी जनहित याचिका में कहा कि इन दोनों बेनामी फ्लैट के मालिक दो राजनीतिक नेताओं के नामों का उल्लेख सीबीआई ने न तो आरोपपत्र में किया और न ही जांच के दौरान कहीं और किया।

उन्होंने अदालत से सीबीआई को या तो दस्तावेज या पुलिस रिपोर्ट प्रस्तुत करने या फिर इन गायब नामों की एक स्वतंत्र जांच करने का निर्देश देने की मांग की।

अदालत ने सीबीआई को बेनामी फ्लैट के मामले की आगे जांच करने और खास तौर से इस पहलू पर ताजा जांच रिपोर्ट 16 दिसम्बर तक प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

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