आमिर के हौसले को सलाम : गर्दन से बैटिंग और पैरों से बॉलिंग करता है वो

जम्‍मू। वह कश्मीर में रहते हैं और क्रिकेट खेलते हैं। यह जानकर भले ही आप इंप्रेस न हों, लेकिन यह जानकर जरूर चौंकेंगे कि उनके हाथ नहीं हैं। हम बात कर रहे हैं कश्मीर के क्रिकेटर आमिर अहमद लोन की।

आमिर

आमिर की बैटिंग और बॉलिंग के हजारों दीवाने

आमिर अहमद लोन बेमिसाल हौसले का नाम है। उनमें तमाम संघर्षों के साथ दुनिया जीतने की जिद है। क्या हुआ जो उनके दोनों बाजू कट गए हैं। मैदान पर अपनी बैटिंग और बॉलिंग के जलवों से वह हजारों की भीड़ को बांध लेते हैं। बचपन से बम, बंदूक के साए में पले-बढ़े हैं, लेकिन शारीरिक अक्षमता को परे रखते हुए उन्होंने क्रिकेट को अपनी जिंदगी बना लिया।

आमिर दस साल पहले हुआ हादसा

बात दस साल पहले की है। एक संडे को मां ने आमिर को भाई को खाना पहुंचाने के लिए भेजा। उन दिनों वह तीसरी जमात में पढ़ते थे। खाना देने के बाद आरा मशीन के पास खेल रहे कुछ बच्चों के साथ वह भी खेलने लगे। खेल-खेल में मशीन में उनके दोनों हाथ आ गए। हाथ बाजुओं से अलग हो गए और आमिर बेहोश हो गए। गांव में उस वक्त न कोई अस्पताल था। एक औरत ने दौड़कर पास ही तैनात सेना के जवानों को बताया। वे उन्हें गांव में मौजूद अस्पताल ले गए। तीन साल तक उनका इलाज चला।

टीचर ने कहा बिना हाथ के कुछ नहीं कर सकते

वापस स्कूल जाने पर अलग तरह की परेशानियां आमिर का इंतजार कर रही थीं। टीचर ने कहा कि तुम स्कूल में बिना हाथ के कुछ कर नहीं सकते, इसलिए बेहतर होगा कि घर पर ही रहो। आमिर याद करते हैं, ‘मैं क्लास में लिख नहीं पाता था। कोई और मेरे लिए लिखता था। कुछ दिनों बाद दूसरे बच्चे मेरी मदद से इनकार करने लगे। ऐसे में या तो मैं पढ़ाई छोड़कर घर बैठ जाता या खुद कोई रास्ता निकालता। एक दिन रास्ते से पेन खरीदा और घर पर ही पैरों से लिखने की प्रैक्टिस शुरू कर दी। कुछ ही दिनों में मैं पैरों से लिखने लगा।’

नदी में डूबने से बचा था आमिर

एक बार आमिर ने साथ के लड़कों को नदी में नहाते देखा। वह भी वहां चले गए। पानी का अंदाजा नहीं था और वह पानी में उतर गए। गहराई की वजह से उनके पैर उखड़ गए और वह डूबने लगे। किनारे पर मौजूद लोगों ने उनकी जान बचाई। वह कहते हैं, ‘अगर उस दिन वे मुझे नहीं बचाते तो शायद मैं जिंदा नहीं होता। मगर उस दिन के हादसे के बाद मैने तय कर लिया कि मैं तैरना सीखूंगा। मैं फिर नदी पर गया और किनारे पर बैठा रहा। वहां मैंने देखा कि नदी में जो बतख तैरती हैं, उनके पास भी हाथ नहीं हैं। मैंने उन्हीं को ध्यान में रखा और जैसे साइकल चलाई जाती है, उस तरह पानी में पैर चलाने की प्रैक्टिस की।’

क्रिकेट की दीवानगी

क्रिकेट का शौक आमिर के भीतर कुलबुला रहा था। आमिर ने प्रैक्टिस शुरू कर दी। गर्दन में बल्ला पकड़ा और बैटिंग शुरू की। गेंद मुंह पर लगने के खतरे के बावजूद बैटिंग जारी रही और धीरे-धीरे परफेक्शन आने लगा। अब बारी बोलिंग की थी। पैरों में बॉल को पकड़ा और एक पैर बैलेंस बना कर बॉल फेंकी। आमिर के घर टीवी नहीं था, लेकिन क्रिकेट के लिए दीवानगी इस कदर थी कि वह दूसरों के घरों में जाकर टीवी देखा करते थे। सचिन तेंदुलकर जब तक बैटिंग करते, आमिर वहीं जमे रहते। एक रोज उनके पिता (बशीर अहमद लोन) उनके लिए टीवी ले आए।

पैरों से लिखकर पढ़ाई करता है आमिर

10 साल की उम्र में दोनों हाथ गंवा चुके कश्मीर के आमिर लोन ने न सिर्फ पैरों से लिख लिखकर पढ़ाई जारी रखी, बल्कि बतख को तैरते देख बिना हाथों के तैरना सीख लिया। गर्दन और कंधे के बीच बैट को दबाकर मुंह पर गेंदें लगते रहने के बावजूद क्रिकेट की प्रैक्टिस जारी रखी। आमिर के गरीब पिता ने अपनी मशीनें बेचकर उसके शौक को उड़ान दी। क्रिकेट से प्यार ने उसे धीरे-धीरे अपने इलाके के लिए आकर्षण का केंद्र बना दिया।


(नवभारत टाइम्‍स से साभार)

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