महंगी कारों से घूमने का शौक है तो आयकर भी भरना पड़ेगा, जानिए क्यों

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आयकर विभाग के अनुसार देश में करीब 25 लाख करदाताओं ने अपनी वार्षिक आमदनी 10 लाख रुपये से ज्यादा की बता रखी है। लेकिन हर साल 25 लाख नई कारों की खरीद हो जाती है। इनमें से 35 हजार कारे करीब दस लाख रुपए से ज्यादा की यानी लग्जरी कारें होती हैं।

आयकर विभाग को चिढ़ाने वाले आंकड़े

  • हर साल खरीदी जाती हैं 25 लाख करें
  • औसतन पांच साल में लोग बदलते हैं कार
  • यानी हर साल लाखों नए लोग खरीद रहे हैं कार
  • लेकिन जितनी संख्या में कार खरीदने वाले बढ़े उतने आयकर देने वाले नहीं बढ़ रहे
  • इन आंकड़ों में पुरानी महंगी कार बेचने और खरीदने वालों का आंकड़ा शामिल नहीं

आयकर रिटर्न भरने में पीछे

आयकर विभाग के अनुसार देश में मात्र 3.65 करोड़ लोगों ने ही 2014-15 में आयकर  रिटर्न भरा था। विभाग का मानना है कि देश में करोड़ों लोग ऐसे हैं जिनकी आमदनी तो काफी ज्यादा है लेकिन वह आयकर नहीं देते हैं।

आयकर विभाग के आंकड़े

वर्ष 2014-15 के आयकर विभाग के आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार जिन लोगों ने आयकर विवरण दिया था उनमें से मात्र साढ़े पांच लाख लोग ही ऐसे थे जिन्होंने पांच लाख रुपए से ज्यादा का आयकर चुकाया। आंकड़े बताते हैं कि यह महज कुछ प्रतिशत लोग ही करीब आधा आयकर चुकाते हैं। यानी बाकी करोड़ों आयकर विवरण भरने वाले सिर्फ आधा ही आयकर टैक्स देते हैं।

एक करोड़ की कमाई वाले चुनिंदा

आयकर विभाग के आंकड़ों के अनुसार देश में 48 हजार लोगों ने अपनी सालाना आय एक करोड़ रुपये से अधिक बताई है। जबकि हर साल बीएमडब्ल्यू, जगुआर, ऑडी, मर्सेडीज और पॉर्श जैसी 35,000 लग्जरी कारें खरीदी जाती हैं।

क्या है सरकार की योजना

सरकार चाहती है कि जिन लोगों की आमदनी आयकर देने लायक है वह आयकर जरूर दें। ऐसे में वह महंगी कारें, महंगे मोाबइल फोन और महंगी चीजे खरीदने वालों पर नजर गड़ाने जा रही है। अब ऐसी वस्तुओं के इस्तेमाल करने वालों को आयकर विभाग की नजर से बच कर निकलाना कठिन होगा।

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