आरक्षण का मामला सुनकर रैली में नहीं आए शाह, तो राजनाथ सिंह बोले…

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आरक्षणलखनऊ। देश में जहां आरक्षण के लिए जगह-जगह पर आंदोलन किया जा रहा है। वहीं बीजेपी सरकार आरक्षण का मामला फिलहाल ठंडे बस्ते में ही रखना चाहती है। राजधानी में आयोजित अधिकार दिलाओ रैली से यह बात साफ हो गई। जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह इस रैली में नहीं आए। वहीं केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह इस रैली में शामिल तो हुए लेकिन इस मुद्दे पर उन्होंने कुछ भी नहीं बोला। रैली के आयोजक बीजेपी सांसद कौशल किशोर ने बदले हुए सुरों के साथ प्रमोशन में आरक्षण की बात कही।

आरक्षण के मुद्दे पर बीजेपी नेताओं में बातचीत

बीजेपी के एक नेता ने दावा किया था कि उनकी सरकार के कई नेताओं से बातचीत हो चुकी है और प्रमोशन में आरक्षण के लिए जल्द ही मोदी सरकार कोई फैसला कर सकती है, लेकिन उन्होंने जिस आरक्षण समाप्ति के लिए जिस तरह बसपा सुप्रीमो मायावती को कठघरे में खड़ा किया और उत्तर प्रदेश में बीजेपी सरकार बनने पर दलितों को न्याय मिलने की बात कहकर इस मामले से खुद को किनारे कर लिया। बीजेपी के लिए आरक्षण का मामला एक तरफ कुआं तो दूसरी तरफ खाई जैसा है।बीजेपी यह मामले में बुरी तरह से फंस गई है, अगर संविधान संशोधन विधेयक न पारित होने पर अगर दलित समाज के अधिकारी व कर्मचारी नाराज हैं तो इस विधेयक को पारित कराने से प्रदेश के पिछड़ों और अगड़ों के भाजपा के खिलाफ होने की आशंका है। यह ज्यादा नुकसानदेह हो सकता है। जहां तक दलितों का सवाल है तो भाजपा के सलाहकारों का मानना है कि इस मुद्दे के रहते भाजपा को जब लोकसभा चुनाव में दलितों का अच्छा-खासा वोट मिल सकता है तो उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भी इस मुद्दे से कुछ न कुछ तो फायदा हो सकता है।

वहीं बीजेपी सरकार को लगता है कि अंबेडकर के नाम पर किए गए काम भी कुछ मदद करेंगे। साथ ही मायावती विरोधी कुछ दलित वोट मिलने की उम्मीद कर रहे हैं। इस वजह से भी बीजेपी अभी आरक्षण के मुद्दे को ठंडे बस्ते में ही रखना चाहती है।

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