सीआरपीएफ की चिट्ठी में इस तरह जोड़ा विवादित पैरा और डाल दिया सोशल मीडिया पर

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लखनऊ। आरटीआई में सीआरपीएफ को फंसाने वाले एक युवक का सच सामने आया तो उसकी मंशा भी समझ आने लगी। दरअसल, आरटीआई में सीआरपीएफ ने एक युवक को जवाब दिया तो उसने उस चिट्ठी में छेड़छाड़ की। उसमें एक नया पैरा्ग्राफ जोड़ा और फिर मीडिया पर डाल दिया। उस चिट्ठी में जोड़े गए पैराग्राफ में उसने लिखा कि सूचना मांगने वाला युवक मुस्लिम समुदाय से संबंधित है और यह समुदाय आतंकवादियों का धर्म है, इसलिए सुरक्षा कारणों से उसे इस बारे में कोई सूचना नहीं दी जा सकती है। जब बवाल मचा तो सीआरपीएफ ने जांच कराई तो असली चिट्ठी सामने आई। युवक की इस हरकत पर उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। उसकी तलाश की जा रही है।

आरटीआई में सीआरपीएफ

आरटीआई में सीआरपीएफ को फंसाने वाले युवक चार फरवरी को मांगी थी सूचना

मामला ये है कि गाजीपुर के उसिया गांव के शम्स तबरेज ने कुछ दिनों पहले सीआरपीएफ से साल 2010 में हुई सिपाही भर्ती परीक्षा की सर्टिफाइड रिपोर्ट आरटीआई एक्ट के तहत मांगी थी। सीआरपीएफ के सेंट्रल ज़ोन के लखनऊ आईजी आफिस ने शम्स तबरेज की अर्जी इलाहाबाद ग्रुप सेंटर को फारवर्ड कर दी। ग्रुप सेंटर के डीआईजी और जन सूचना अधिकारी डीके त्रिपाठी ने इसी साल चार फरवरी को शम्स तबरेज को भेजे गए जवाब में बताया कि सुरक्षा कारणों से इस तरह की सूचना नहीं दी जा सकती है। चिट्ठी में यह भी लिखा गया कि आरटीआई एक्ट 2005 के अध्याय 6 के सेक्शन 24 (1) के तहत उनके विभाग को इस तरह की सूचनाएं सार्वजनिक करने से मुक्त रखा गया है।

सीआरपीएफ की इस चिट्ठी में की गई छेड़छाड़

आरोप है कि शम्स तबरेज ने जवाब में आई चिट्ठी में छेड़छाड़ कर उसमें एक विवादित पैराग्राफ जोड़ दिया और उस चिट्ठी को सोशल मीडिया पर जारी कर दी। शम्स तबरेज ने पत्र में जोड़ा है कि सूचना मांगने वाला युवक मुस्लिम समुदाय से संबंधित है और यह समुदाय आतंकवादियों का धर्म है, इसलिए सुरक्षा कारणों से उसे इस बारे में कोई सूचना नहीं दी जा सकती है। सोशल मीडिया पर यह फर्जी चिट्ठी वायरल होने के बाद जब हड़कम्प मचने लगा तो सीआरपीएफ के ग्रुप सेंटर के अफसरों से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई। अफसरों ने दफ्तर में छानबीन कराई तो यह चिट्ठी फर्जी निकली।

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