चेकिंग अभियान में आरटीओ ने रोकी स्कूटी, नंबर प्लेट देखकर दंग रह गए अधिकारी

भोपाल: ‘जब सईयां भए कोतवाल तो अब डर काहे का’। ये कहावत सिर्फ कहावत नहीं बल्कि एक हकीकत है। आज के समय में अगर किसी परिवार में कोई रुतबेदार पद पर पहुंच जाता है तो उस पदाधिकारी की पॉवर तो बढ़ती ही है। उसका परिवार और रिश्तेदार भी खुद को उतना ही रुतबेदार समझने लगता है। ऐसे ही एक रुतबे का सामना आरटीओ को करना पड़ा।

इसका ताजा उदाहरण मध्य प्रदेश के श्योरपुर जिले से तब सामने आया जब आरटीओ ने वाहन चेकिंग के दौरान उस स्कूटी को रोका जिसके नंबर प्लेट पर नंबर की जगह लिखा था- कलेक्टर का भाई लखमी सिंह मीणा। रोके जाने के बाद स्कूटी मालिक ने आरटीओ कर्मचारियों से जमकर रौब भी झाड़ा।

दरअसल, श्योरपुर जिले में आरटीओ के स्तर से वाहन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। इस दौरान चेकिंग अभियान चला रहे अधिकारियों और कर्मचारियों ने एक ऐसी स्कूटी रोकी जिसपर नंबर की जगह प्लेट पर कलेक्टर का भाई लखमी सिंह मीणा लिखा था।

जब अधिकारियों ने नंबर प्लेट पर नंबर की जगह कलेक्टर के जिक्र के बारे में पूछा तो स्कूटी मालिक भड़क उठा और चिल्लाते हुए बोला कि मेरा भाई कलेक्टर है। इस पर आरटीओ उन्हें कलेक्ट्रेट लेकर गए। जहां पता चला कि मीणा के रिश्ते के भाई राजस्थान के किसी जिले में कलेक्टर हैं।

लखमी सिंह मीणा ने कथित कलेक्टर भाई का विजिटिंग कार्ड भी दिखाकर कार्रवाई से बचने की कोशिश की मगर आरटीओ एबी कैबरे पर कोई फर्क नहीं पड़ा। अधिकारियों ने आखिरकार चालान करके ही स्कूटी छोड़ी। उधर, जब पत्रकारों ने राजस्थान में तैनात कलेक्टर से बातचीत की तो उन्होंने किसी भी रिश्तेदारी होने की बात को सिरे से खारिज कर दिया।

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