आर.के. चौधरी ने बसपा के कार्यकर्ताओं को बताया जहरीले सांप और बिच्छू

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लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी से बाहर आए बहुजन समाज स्वाभिमान संघर्ष समिति (बीएस-4) के राष्ट्रीय अध्यक्ष आर.के. चौधरी देश में व्याप्त ‘वर्ण व्यवस्था’ से काफी आहत हैं। उनका कहना है कि कांशीराम के बसपा रूपी घोसले में आज जहरीले सांप और बिच्छू अपना डेरा जमा चुके हैं।

आर.के. चौधरी

आर.के. चौधरी भी यात्रा निकालने को तैयार

चौधरी 11 सितंबर से लखनऊ से एक ‘सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति आंदोलन’ के तहत एक यात्रा निकालने जा रहे हैं। समाज में परिवर्तन के उद्देश्य से शुरू की जा रही यह यात्रा 30 सितंबर को जनपद इलाहाबाद के चर्च मैदान में आयोजित एक रैली से अपने प्रथम चरण को पूरा करेगी।

चौधरी का कहना है कि कांशीराम के बसपा रूपी घोंसले में आज जहरीले सांप और बिच्छू अपना डेरा जमा चुके हैं। ऐसे में देर-सबेर ही सही, लेकिन बीएसपी के जमीनी कार्यकर्ता घोंसले से निकलेंगे और सामाजिक परिवर्तन के लक्ष्य को पाने के लिए हमारे कदम से कदम मिलाएंगे।

बहुजन समाज स्वाभिमान संघर्ष समिति (बीएस-4) के राष्ट्रीय अध्यक्ष आर.के. चौधरी ने विशेष बातचीत में कहा, “दलितों और पिछड़ों की स्थिति सुदृढ़ किए बगैर राष्ट्र निर्माण की कल्पना ही बेईमानी है। संविधान लागू होने के 66 वर्ष से बाद भी आज दलित और पिछड़ा चौराहों पर लेबर अड्डे पर मजदूरी के लिए खड़ा दिखता है।”

उनका कहना है कि समान अधिकार वाले समाज के लिए अलग से किसी बजट की आवश्यकता नहीं है, बल्कि नीयत की जरूरत है। प्रदेश की जनता से अपील करते हुए चौधरी कहते हैं, “हम सामाजिक परिवर्तन की लड़ाई लड़ रहे हैं। ऐसे में सत्ता परिवर्तन हो या न हो लेकिन उनके समाज के परिवर्तन के लक्ष्य में उनका समर्थन दें।”

बतौर चौधरी ‘सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति आंदोलन’ के लक्ष्य के साथ चलने वाली यह यात्रा पहले चरण में लखनऊ, उन्नाव, कानपुर, हरदोई, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, बाराबंकी, फैजाबाद, सुलतानपुर, रायबरेली, प्रतापगढ़ और इलाहाबाद में भ्रमण करेगी। इस यात्रा के दौरान 150 मीटिंग होंगी।

उप्र विधानसभा चुनाव में उनकी स्थिति के संदर्भ में चौधरी ने बताया कि विस चुनाव में वह बीएस-4 को बसपा के विकल्प के रूप में खड़ा करना चाहते हैं।

चौधरी ने बताया कि बीएस-4 लखनऊ, कानपुर, फैजाबाद और इलाहाबाद मंडल की सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी। उनके पास 150 उम्मीदवार अपनी दावेदारी पेश कर चुके हैं।

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