कोचिंग संस्थानों को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, दिया अहम फैसला

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसला सुनाते हुए कहा है कि सिर्फ प्रवेश परीक्षा के आधार पर इंजीनियरिंग और मेडिकल में दाखिला देना सही नहीं है। 12वीं के नतीजों को भी महत्व दिया जाना चाहिए। इस टिप्पणी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने निजी कोचिंग संस्थानों के खिलाफ दायर 3 साल पुरानी याचिका का निपटारा कर दिया।

इंजीनियरिंग और मेडिकल में दाखिला

इंजीनियरिंग और मेडिकल में दाखिला दिलाने पर होता है खिलवाड़

स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया ने 2014 में दाखिल याचिका में इंजीनियरिंग और मेडिकल की तैयारी के लिए बड़े पैमाने पर खुले कोचिंग इंस्टिट्यूट का मसला उठाया था। याचिका में कहा गया था कि ये व्यवसाय अब 35 हज़ार करोड़ रुपए का उद्योग बन चुका है। लेकिन इसके ऊपर कोई सरकारी नियंत्रण नहीं है। कोचिंग इंस्टिट्यूट छात्रों के शोषण का अड्डा बन गए हैं।

स्‍कूल की पढ़ाई का अलग होता है तरीका

याचिका में कहा गया था कि इंजीनियरिंग/मेडिकल की प्रवेश परीक्षा में सवाल पूछने का तरीका स्कूल की पढ़ाई से काफी अलग होता है। इसका फायदा निजी संस्थान उठाते हैं। ऊंची फ़ीस लेकर ये अभिभावकों का आर्थिक शोषण करते हैं। साथ ही मानसिक रूप से बच्चों को भारी दबाव में डाल देते हैं।

कोचिंग संस्‍थानों पर कसनी चाहिए नकेल

याचिका में कोचिंग संस्थानों पर पाबंदी लगाने या उनके लिए सरकारी नियम की मांग की गयी थी। कहा गया था कि ये इंस्टिट्यूट तरह-तरह के लुभावने विज्ञापन के ज़रिए किशोर उम्र के बच्चों को आकर्षित करते हैं। कई शहरों में तो कोचिंग का धंधा मुख्य कारोबार बन गया है। वहां से अक्सर मानसिक दबाव में बच्चों की आत्महत्या की खबरें आती हैं।

60फीसदी नंबर एंट्रेंस से मिलना चाहिए

वहीं इस मामले पर बेंच का मानना था कि स्कूल की पढ़ाई का महत्व बनाए रखना चाहिए। बेंच ने सुझाव दिया कि इंजीनियरिंग और मेडिकल में प्रवेश देते वक्त 12वीं की परीक्षा के रिजल्ट से 40 फीसदी नंबर जोड़े जाने चाहिए। जबकि 60 फीसदी नंबर एंट्रेंस एक्ज़ाम से लिए जाने चाहिए।

जल्‍द होगा एजेंसी का गठन

सरकार की तरफ से पेश वकील ने कहा कि सरकार जल्द ही राष्ट्रीय स्तर पर प्रवेश परीक्षा लेने के लिए एक एजेंसी का गठन करने जा रही है। परीक्षा से जुड़े नियम बनाते समय कोर्ट के सुझाव का भी ध्यान रखा जाएगा।

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