इंडियन आर्मी हथियारों के मामले में होगी आत्मनिर्भर

नई दिल्ली। मात्र एक दशक में इंडियन आर्मी को हथियारों के मामले में आत्म निर्भर बनाने की तैयारी है। अपने देश की सुरक्षा, अपने हथियारों से आने वाले समय में सेना का यह नया स्लोगन बन सकता है।

इंडियन आर्मी

2027 तक इंडियन आर्मी की देसी हथियारों पर निर्भरता बढ़ाने की तैयारी है। भारतीय सेना ने अपनी जरूरत के हथियार देश के अंदर बनाने के लिए ‘आर्मी डिजायन ब्यूरो’ बनाने का फैसला भी ले लिया है। सेना की यह पहल रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन और आर्डिनेंस फैक्ट्री को सहायता करने के लिए है ताकि भविष्य में जरूरत के मुताबिक हथियारों का निर्माण देश में ही हो सके।

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इंडियन आर्मी स्वदेशीकरण पर जोर

सेना ने स्वदेशीकरण पर जोर देने की रणनीति में 155 एमएम की तोपें, वायु रक्षा प्रणाली और हल्के हेलिकॉप्टर को सबसे ज्यादा प्राथमिकता देने का फैसला किया है। इसके अलावा भारतीय सेना अपनी जरूरतों की खरीदारी में तेजी लाने की दिशा में भी काम कर रही है। पिछले डेढ़ साल में `मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के लिए कई निजी कंपनियों को लाइसेंस दिए गए हैं। रक्षा खरीद नीति के लिए ड्राफ्ट तैयार करने वाली धीरेंद्र सिंह कमिटी ने भी माना कि “मेक इन इंडिया” मुहिम को जोर-शोर से लागू करने के बाद भी हालात सुधरने में डेढ़ दशक लग जाएगा।

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भारत को लगभग पौने दो लाख बुलेट प्रूफ जैकेटों की जरूरत है। पिछले साल दर्जनों जवान बुलेट प्रूफ जैकेट की कमी के चलते अपनी जान गंवा चुके हैं। गौरतलब है कि पिछले छह साल से भारतीय रक्षा मंत्रालय बेहतर बुलेट प्रूफ जैकेट की तलाश कर रहा है। इसी तरह 2011 में भारतीय रक्षा मंत्रालय ने 66 हजार एसॉल्ट राइफल के लिए निविदा निकाली लेकिन करीब 5 साल बाद भी सेना की जरूरत के लिहाज से अच्छी गुणवत्ता वाली राइफल नहीं मिल सकी है। ऐसे में यह पहल महत्वपूर्ण है बशर्ते देश की सुरक्षा से कोई खिलवाड़ न होने पाये।

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