इंडोनेशिया में फिर कांपी धरती, भारत में बड़े भूकंप की चेतावनी

इंडोनेशिया जकार्ता/नई दिल्‍ली। इंडोनेशिया के उत्तरी सुलावेसी प्रांत में जबरदस्‍त भूकंप के झटके महसूस किए गए, लेकिन इसमें किसी के हताहत होने या किसी नुकसान की कोई खबर नहीं है।

इंडोनेशिया में 6.8 रही तीव्रता

अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के मुताबिक भूकंप की तीव्रता 6.8 रही। वहीं इसका केंद्र फिलीपीन के सांरगानी के 233 किलोमीटर दक्षिण पूर्व में 12.9 किलोमीटर की गहराई पर बताया जा रहा है।

इंडोनेशिया की मौसम एवं भूगर्भ विज्ञान एजेंसी ने कहा कि सोमवार को अंतरराष्ट्रीय समयानुसार शाम चार बजकर 38 मिनट पर आया। भूकंप उत्तरी सुलावेसी प्रांत में तालौद द्वीपसमूह के लगभग 58 किलोमीटर दक्षिण पूर्व में केंद्रित था। इससे सुनामी का कोई खतरा नहीं है। एजेंसी ने कहा कि तालौद के मेलंगुआने शहर में भूकंप का जबर्दस्त झटका महसूस किया गया।

8.2 तीव्रता के भूकंप का खतरा

केन्‍द्रीय गृह मंत्रालय के आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों ने 4 जनवरी को पूर्वोत्‍तर भारत में आए भूकंप के बाद चेतावनी दी है कि बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली समेत पहाड़ी राज्‍यों पर जल्‍द बड़ी तबाही आ सकती है। विशेषज्ञों ने संकेत दिए हैं कि भूकंप की तीव्रता 8.2 या इससे भी अधिक हो सकती है।

यहां सबसे ज्यादा खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि इन इलाकों में मणिपुर, नेपाल, सिक्किम में मची तबाही से अधिक तीव्रता वाला भूकंप आ सकता है। हाल में मणिपुर में 6.7 (जनवरी 2016), नेपाल में आए 7.3 (मई 2015) और सिक्किम में 2011 में 6.9 की तीव्रता वाले भूकंपों की वजह से भूगर्भीय प्लेटों में उथल पुथल हो गई थीं और इनमें दरारें हो गई थीं। हाल ही में आए भूकंपों की वजह से यह और भी गंभीर हो गई है।

पिछले दिनों ईटानगर में आयोजित हुई एनआईडीएम (राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन) की एक बैठक में पहाड़ों पर मंडरा रहे इस बेहद गंभीर संकट से निपटने के लिए एक कार्यक्रम व योजना शुरू करने का फैसला किया। इस बैठक में 11 पहाड़ी राज्यों के नीति-निर्माताओं ने हिस्सा लिया था।

एनआईडीएम के निदेशक संतोष कुमार का कहना है कि भूटान, नेपाल, म्यांमार और भारत की भूगर्भीय प्लेटें आपस में जुड़ी हुई हैं। भूकंपीय संवेदनशीलता के मुताबिक, भारत 4 वर्ग में बंटा हुआ है। सबसे अधिक संवेदनशील क्षेत्रों में पूर्वोत्तर के राज्य, उत्तरी बिहार, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, गुजरात और अंडमान व निकोबार द्वीप शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बड़ी जनसंख्या वाले किसी शहरी इलाके में भूकंप आएगा तो जानमाल का बहुत नुकसान हो सकता है।

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