#EconomicSurvey  में देश की रफ्तार बढ़ने के संकेत  

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नयी दिल्ली। केंद्र सरकार ने संसद में इकोनॉमिक सर्वे 2016-17 पेश कर दिया है। इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2017 में देश की जीडीपी ग्रोथ 7-7.75 फीसदी रहने का अनुमान है। वहीं वित्तीय वर्ष 2016 में जीडीपी ग्रोथ 7.6 फीसदी रहने का अनुमान है। हालांकि अगले कुछ सालों में जीडीपी ग्रोथ 8 फीसदी रहने का अनुमान है।

इकोनॉमिक सर्वे 4

इकोनॉमिक सर्वे  के मुताबिक नहीं बढ़ेगी महंगाई

संसद में पेश किए गए इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक वेतन आयोग की सिफारिशों से महंगाई नहीं बढ़ेगी। वित्तीय वर्ष 2017 में रिटेल महंगाई दर 4.5-5 फीसदी रह सकती है। वहीं वित्त वर्ष 2017 में करंट अकाउंट घाटा, जीडीपी का 1-1.5 फीसदी रहने का अनुमान है। वित्तीय वर्ष 2016 में 3.9 फीसदी के वित्तीय घाटे के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। जबकि वित्तीय वर्ष 2017 में वित्तीय घाटे की स्थिति चुनौती भरी रहेगी। वित्त वर्ष 2016 में सर्विस सेक्टर की ग्रोथ 9.2 फीसदी रहने का अनुमान है। वित्तीय वर्ष 2016 में टैक्स वसूली बजटीय अनुमान से ज्यादा रह सकती है। मार्च 2017 तक आरबीआई 5 फीसदी महंगाई का लक्ष्य हासिल कर लेगी। सरकार ने बैंकों में 70000 करोड़ रुपए की पूंजी डालने का ऐलान किया है, लेकिन वित्तीय वर्ष 2019 तक बैंकों को 1.8 लाख करोड़ रुपए की पूंजी की जरूरत पड़ेगी।

सर्विस सेक्टर में होगी अच्छी ग्रोथ

एक्सपोर्ट में मामूली सुधार होने की संभावना है और मंदी के बावजूद सर्विस सेक्टर में अच्छी ग्रोथ की उम्मीद है। सिंचाई में निवेश बढ़ाने की सख्त जरूरत है। बचत और निवेश में सुधार की संभावना काफी कम है। 2016-17 में 2015-16 के मुकाबले ग्रोथ में बड़ी तेजी की संभावना कम है। ग्लोबल स्लोडाउन का घरेलू अर्थव्यवस्था पर असर दिखेगा। स्टील इंपोर्ट पर अब और पाबंदी स्टील का उपयोग करने वाली इंडस्ट्रीज पर बुरा असर डालेंगी। स्टील इंपोर्ट पर पाबंदी से कंस्ट्रकक्शन क्षेत्र की लागत 1.7 फीसदी बढ़ सकती है। दूसरे देशों के मुकाबले भारतीय स्टील इंडस्ट्री की हालत अच्छी नहीं है। सरकार स्टील और एल्युमीनियम इंपोर्ट पर किसी तरह की पाबंदी के पक्ष में नहीं है। इनकम टैक्स छूट का दायरा बढ़ाने की जरूरत नहीं है, लेकिन कॉरपोरेट टैक्स को जल्द से जल्द 30 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी किया जाना चाहिए। साथ ही खेती से होने वाली आय पर टैक्स लगाया जाना चाहिए और प्रॉपर्टी पर टैक्स बढ़ाना चाहिए।

इकोनॉमिक सर्वे 5

एफडीआई पॉलिसी पर उठाए गए सवाल

इकोनॉमिक सर्वे में सरकार की एफडीआई पॉलिसी पर सवाल उठाया गया है। टैक्स बचाने के लिए विदेशी निवेश के नियमों के गलत इस्तेमाल की आशंका है, ऐसे में विदेशी निवेश की समीक्षा होनी चाहिए। इस बात की भी जांच हो कि विदेशी निवेश टैक्स बचाने के लिए तो नहीं हो रहा है। इकोनॉमिक सर्वे पर अपनी राय देते हुए जायफिन रिसर्च के चीफ इकोनॉमिस्ट देबोपम चौधरी ने कहा कि 7-7.5 फीसदी की ग्रोथ हासिल करना मुश्किल होगा। हमारी इकोनॉमी एक्सपोर्ट पर निर्भर नहीं है और घरेलू खपत पर जीडीपी ग्रोथ निर्भर करती है, ऐसे में बेहतर ग्रोथ के लिए कंज्यूमर सेंटीमेंट में सुधार जरूरी है।

वित्तीय जानकारों का क्या है कहना

वहीं मार्केट के जानकारों के मुताबिक बाजार को सरकार से 15 फीसदी अर्निंग ग्रोथ का भरोसा नहीं है और बाजार इकोनॉमी में कमजोरी के संकेत दे चुका है। हालांकि सरकार का स्कोर कार्ड अच्छा है, सरकार ने करेंट अकाउंट और वित्तीय घाटे पर काफी नियंत्रण किया है। हालांकि सरकार को पब्लिक इन्वेस्टमेंट बढ़ाने पर फोकस तेज करना होगा। कुछ जानकारों का कहना है कि सरकार ने इकोनॉमिक सर्वे में अर्थव्यवस्था की सही तस्वीर पेश की है, ऐसे में ये संकेत दिख रहे हैं कि बजट लोकलुभावना नहीं होगा। कच्चे तेल में गिरावट से भारत को कई फायदे हुए हैं, ऐसे में सरकार का जोर फिस्कल कंसोलिडेशन पर रहने की उम्मीद है। जबकि कुछ लोग मानते हैं कि इस बार गांव, गरीब और किसानों यानि भारत का बजट होगा। बजट में सिंचाई, ग्रामीण, मनरेगा और डीबीटी से जुड़ी अच्छी खबरें आएंगी। सब्सिडी को युक्तिसंगत बनाने के एलान होंगे। इनकम टैक्स का स्लैब 2.5 लाख रुपए से बढ़ाकर 2.9 लाख रुपए होगा। सस्ते होम लोन का एलान होगा और सर्विस टैक्स बढ़ने की पूरी संभावना है।

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