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इलाज के लिए अस्पतालों में भर्ती कैदियों की रिपोर्ट तलब की हाईकोर्ट ने

इलाहाबाद। हाईकोर्ट इलाहाबाद ने सूबे की सरकार से प्रदेश के जेलों में बंद कुल कैदियों की जानकारी मांगी है। कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि कितने और विचाराधीन व सजायाफ्ता बंदियों को इलाज के लिए अस्पतालों में भर्ती कराया गया है और उन्हे किस तरह की दिक्कत है इसका भी उल्लेख करते हुए कोर्ट ने ऐसे लोगों की भी जानकारी मांगी है।   ऐसे मामलों में की गई कार्रवाई की भी कोर्ट ने जानकारी मांगी है।

उम्र कैद की सजा से दंडि‍त अपराधी रामबृक्ष की अपील पर दाखिल वादी की अर्जी पर सुनवाई करते हुए जस्टिस अरविंद कुमार त्रिपाठी व जस्टिस वीपी पाठक की खंडपीठ ने यह आदेश दिया। वादी ने अर्जी देकर शिकायत की थी की अभियुक्त अपनी पंहुच के कारण उम्र कैद की सजा होने के बावजूद जेल के बजाए हॉस्पिटल में भर्ती है, जबकि मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, उसका इलाज जेल में हो सकता है।

वादी के वकील का कहना था कि पिछले आदेश में कोर्ट ने चीफ सेक्रेटरी से हलफनामा दाखिल कर इस संबंध में बताने को कहा था कि ऐसा किस प्रकार से संभव हुआ और इसके लिए दोषी अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की गई। चीफ सेक्रेटरी के हलफनामे में इस बात की जानकारी नहीं दी गई। संबंधि‍त अधिकारी के विषय में कोई जांच की गई है या किसी से स्पस्टीकरण मांगा गया है।
मुख्‍य सचिव से  जवाब तलब
न्यायालय  ने मुख्य सचिव को जांच का जिम्मा सौंपते हुए कहा है कि  इस मामले में किस अधिकारी की लापरवाही है और क्या डॉक्टरों पर बंदी को हॉस्पिटल में भर्ती करने का कोई दबाव था। साथ ही पूरे प्रदेश में हॉस्पिटलों में भर्ती कैदियों की भी रिपोर्ट मांगी है।

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