हाजियों की कलाई पर इस बार से रहेंगे ई-ब्रेसलेट

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नई दिल्ली। इस साल हज यात्रा पर जाने वाले लोगों को अपनी कलाई ई-ब्रेसलेट बांधना होगा। सऊदी अरब सरकार ने लोगों की सुरक्षा के लिए इस साल से ये प्रबंध किये हैं।

पिछले साल हज के दौरान सितंबर में भगदड़ मचने से 2297 लोगों की मौत हो गई थी। हज के इतिहास में इसे एक बड़ा हादसा माना गया था। इस हादसे में मारे गए लोगों को पहचानने में काफी दिक्कत आई थी। इसी वजह से सरकार ने एतिहातन इस साल से हज यात्रियों को ई-ब्रेसलेट देने का फैसला किया है।

ई-ब्रेसलेट

ई-ब्रेसलेट से हज यात्रा में काफी मदद मिलेगी

सऊदी गजेट की रिपोर्ट के अनुसार इस ब्रेसलेट से पहचान करने में आसानी होगी और सुरक्षा के नजरिए से इसका अहम रोल होगा।

हज यात्रा के दौरान लोगों को दिये जाने वाले ई-ब्रेसलेट वॉटरप्रूफ होंगे। ये एक जीपीएस सिस्टम से जुड़े होंगे। इसके अलावा इनमें हर हज यात्री का नाम पता और मेडिकल रिकॉर्ड की जानकारी दर्ज होगी। इसमें जीपीएस होने की वजह से हजयात्री की लोकेशन का पता भी आसानी से चल सकेगा।

कई भाषाओं में मिलेगी हज की रस्मों की जानकारी

ई-ब्रेसलेस के साथ ही हज यात्री इस बार एक मल्टी लिंगुअल डेस्क से भी जुड़े रहेंगे जो उनको उनकी भाषा में हज के दौरान अदा की जाने वाली तमाम रस्मों और उनके टाइम की जानकारी देगी।

हज के लिए हर साल दुनियाभर से 2 करोड़ से ज्यादा मुसलमान पहुंचते हैं। हज को मुसलमानों में सबसे ज्यादा पवित्र माना गया है।

 

ई-ब्रेसलेट 1
पिछले साल भगदड़ के बाद का दृश्य (फाइल फोटो)

मक्का की मस्जिद में भी लगेंगे सीसीटीवी कैमरे

इसके अलावा इस बार लोगों पर निगरानी रखने के लिए 800 सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जा रहे हैं। इस्लाम की सबसे पवत्रि जगह मक्का की मस्जिद में भी सीसीटीवी से निगरानी की जाएगी।

गौरतलब है कि पिछले साल हज यात्रा के दौरान भगदड़ मच गई ती जिसमें सैंकड़ों लोगों की जान चली गई थी। सऊदी सरकार की मंशा इस बार किसी भी तरह की कोताही बरतने की नहीं है। मीना में जमारात के पास शैतान को पत्थर मारते वक्त ये हादसा हुआ था।

 

 

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