उत्तरकाशी में विदेशियों ने योग के साथ सीखा कर्म योग

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देहरादून। उत्तराखंड को सबसे खूबसूरत प्रदेश माना जाता है। यहां कई धार्मिक स्थल भी मौजूद हैं। इसी लिए इसे देवभूमि भी कहा जाता है। गंगा का तट के किनारे बसा उत्तरकाशी शहर योग और आध्यात्म के साथ कर्म योग की नगरी बनती जा रही है।

उत्तरकाशी

उत्तरकाशी में योग ध्यान का प्रशिक्षण ले रहे हैं विदेशी

पिछले एक माह से उत्तरकाशी में योग ध्यान का प्रशिक्षण ले रहे विदेशी साधकों ने कर्म योग का प्रदर्शन किया। आश्रम निर्माण के लिए इन साधकों ने सड़क से आश्रम तक ईंटें भी पहुंचाई।

गंगोत्री हाईवे स्थित तपोवन आश्रम में ब्रिटेन, फ्रांस, साउदी अरब, कनाडा सहित आदि देशों से आए 12 विदेशी और 15 भारतीय 10 सितंबर 2016 से शिवानंद आश्रम में योगा कर रहे हैं।

इन दिनों में इन साधकों ने योग प्रशिक्षक पीयूष बलूनी से योग, ध्यान की कई बारीकियां सीखी। योग के साथ विदेशियों को संस्कृत भाषा का ज्ञान भी दिया गया। जिससे योग साधकों को सूर्य नमस्कार, प्रार्थना का अभ्यास आसानी से कर सके।

इसके साथ ही गंगा दर्शन, गंगोत्री धाम के दर्शन, उत्तरकाशी के प्रमुख मंदिरों के दर्शन भी कराए गए।लेकिन, इन योग साधकों की इस साधना में कर्म योग का भी अध्याय जुड़ा। इन विदेशी व भारतीय योग साधकों ने निर्माणाधीन सोम आश्रम के निर्माण के लिए सड़क से आश्रम तक ईंटें पहुंचाई। करीब दो घंटे तक इन साधकों ने यह कार्य किया।

विदेशी साधकों के द्वारा किए गए कार्य को देख कर स्थानीय लोग भी हैरान रहे। फ्रांस के स्टीफन, ब्रिटेन की रिवेका व नाथन ने बताया कि उत्तरकाशी में गंगा की निर्मलता और यहां के शांति युक्त वातावरण में उन्होंने योग के साथ कर्म योग की साधना प्राप्त की है। इस योग को वे अपने देश लौटकर औरों तक भी पहुंचाएंगे।

 

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