अगले 48 घंटों में उत्तराखंड के मौसम में होंगे कई बदलाव

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देहरादून। क्लाइमेट चेंजिंग से उत्तराखंड का मौसम भी अछूता नहीं है। उत्तराखंड का मौसम लगातार शुष्क रहने से राजधानी दून में भी पारा 29 डिग्री का आंकड़ा छू गया है। बीते पांच सालों के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो दो मार्च यानी बुधवार का दिन सबसे गर्म साबित हुआ। मौसम विभाग ने हालांकि अभी पश्चिमी विक्षोभ की वजह से गर्मी से कुछ राहत के आसार बताए हैं लेकिन राजधानी में बारिश न होने का असर भी तापमान में लगातार पड़ रहा है।

उत्तराखंड का मौसम 1

उत्तराखंड का मौसम अभी और बदलेगा

पल-पल बदल रहे मौसम का नतीजा है कि राजधानी में बीते पांच साल में बुधवार का दिन सबसे गर्म साबित हुआ। इस बीच मौसम विभाग ने अगले दो दिनों में मौसम में और बदलाव आने की बात कही है। मौसम विभाग ने प्रदेश के कुछ क्षेत्रों खासकर उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ इन चार जिलों में हल्के बादल और हल्की बारिश की संभावना जताई है। ऊंचाई वाले कुछ स्थानों पर हल्की बर्फबारी भी हो सकती है। वहीं राजधानी में भी आंशिक बादल छाने की उम्मीद जताई है। मौसम विभाग के निदेशक बिक्रम सिंह ने कहा कि पश्चिमी विक्षोभ के चलते ही प्रदेश के कुछ स्थानों पर धुंध छाई रहेगी और राजधानी में हल्की बारिश भी हो सकती है।

एक नजर पिछले पांच सालों के 2 मार्च के तापमान पर

2011 – 23.4 डिग्री

2012 – 26.6 डिग्री

2013 – 26.7 डिग्री

2014 – 15.9 डिग्री

2015 – 14.8 डिग्री

उत्तराखंड का मौसम 4

बदलते मौसम से जड़ी-बूटियां हो रहीं बर्बाद

हिमालयी क्षेत्रों में लगातार बदल रहे मौसम से यहां पैदा होने वाली जड़ी-बूटियां अपना औषधीय प्रभाव खो रही हैं। इसका खुलासा जीबी पंत हिमालयी पर्यावरण और विकास संस्थान के वैज्ञानिकों के शोध में हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि जड़ी बूटियां 30 से 40 प्रतिशत औषधीय प्रभाव खो चुकी हैं और जल्द ही प्रभावी कदम न उठाए तो आयुर्वेद चिकित्सा पर गहरा संकट आ सकता है। संस्थान के डा. प्रकाश फोंदणी का कहना है कि संस्थान ने करीब 15 औषधीय जड़ी बूटियों पर शोध किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्र के जलवायु में हो रहे परिवर्तन से जड़ी बूटियों का जीवन चक्र प्रभावित हुआ है। विशेषज्ञो ने अतीश, कुटकी, बालछढ़ी सतावर, हत्थाजड़ी, जटामासी, चंद्रा, कूट, ब्रह्म कमल, चिरायता और वनककड़ी आदि औषधियुक्त जड़ी बूटियों पर शोध किया है। यह जड़ी बूटियां सामान्य बीमारियों से लेकर कैंसर, मधुमेह, सर्पदंश, डायरिया जैसे गंभीर रोगों के उपचार में भी प्रयोग की जाती हैं।

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