उत्तराखंड की बेटी ने दुनियाभर में भारत का नाम किया रोशन

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देहरादून। दुनिया में एक बार फिर उत्तराखंड की बेटी ने भारत का नाम रोशन किया है। अर्चना पैन्यूली ने डेनमार्क में न सिर्फ हिंदी का बल्कि पूरब और पश्चिम के मिलन पर केंद्रित उनकी पुस्तक ‘पॉल की तीर्थयात्रा’ के जरिये ध्यान खींचा है।

उत्तराखंड की बेटी

उत्तराखंड की बेटी ने डेनमार्क में किया तीर्थयात्रा का विमोचन

उत्तराखंड की बेटी अर्चना वर्ष 1998 से डेनमार्क में अध्यापन के साथ ही साहित्य सृजन और हिंदी की सेवा में जुटी हैं। कोपेनहेगन यूनिवर्सिटी में आयोजित हिंदी संध्या में उनके तीसरे उपन्यास ‘पॉल की तीर्थयात्रा’ का विमोचन करते हुए भारतीय राजदूत राजीव शहारे ने इस प्रयास की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

उपन्यास की विशेषता पूर्वी और पश्चिमी संस्कृतियों के भावों का मिश्रण। जब मनुष्य की भावनाएं सर्वत्र एक जैसी ही हैं। तो हम एक-दूसरे से इतने भिन्न क्यों, इस प्रश्न को उपन्यास में प्रभावशाली ढंग से उभारा गया है। उपन्यास के विमोचन के बाद उत्तरी यूरोप में हिंदी की दशा पर विमर्श भी हुआ।

बात निकलकर आई कि हिंदी एक विशाल जनसंख्या की मातृभाषा और विश्व स्तर की प्रमुख भाषाओं में एक है। लेकिन, जो संभावनाएं हैं, उसके अनुरूप हिंदी को स्थान मिलना चाहिए। जोर दिया गया कि हिंदी संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषा बननी चाहिए। बता दें कि इससे पहले भी पहाड़ की और भी बेटियों ने देश का नाम रोशन किया है।

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