उत्तराखंड के दिव्यांगों को सौगात, जल्द खुलेंगे दो ITI

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देहरादून। दिव्यांगों की बेहतरी और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिये हर स्तर र कोशिशें शुरु हो गयी हैं। इसी कड़ी में उत्तराखंड के दिव्यांगों को भी दो आईटीआई की सौगात मिलने जा रही है। महाराष्ट्र के बाद उत्तराखंड दूसरा राज्य होगा, जहां पर केवल दिव्यांगों (विकलांग) के लिए अलग आईटीआई खुलेंगी। सीएम हरीश रावत ने हरिद्वार के लालढांग और अल्मोड़ा के देवलीखाल में दिव्यांगों के लिए एक-एक आवासीय आईटीआई को हरी झंडी दे दी है। अभी तक दिव्यांगों के लिए पृथक आईटीआई केवल महाराष्ट्र के वर्धा शहर में ही संचालित हो रही है।

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उत्तराखंड के दिव्यांगों के लिए सीएम की पहल

उत्तराखंड में बनने वाले इन दोनों आईटीआई के निर्माण का काम इसी साल शुरू होगा और इन दोनों संस्थानों में केवल दिव्यांगों को ही प्रशिक्षण दिया जाएगा।  सीएम रावत से मंजूरी मिलने के बाद शासन ने दोनों आईटीआई के निर्माण की गाइड लाइन और संभावित कोर्स की सूची भी जारी कर दी।

प्रशिक्षण विभाग ने दोनों संस्थानों के निर्माण के लिए जारी गाइड लाइन में इस बात को प्रमुखता से रखा है कि निर्माण कार्य इस तरह से किए जाएं, जिससे दिव्यांगों के लिए विशेष रूप से निर्धारित फ्रेंडली स्टैंडर्ड का पूरा अनुपालन हो सके। इसके तहत क्लास रूम, प्रयोगशाला, वॉशरूम, रैम्प, लिफ्ट आदि की पूरी व्यवस्था विशेष मानकों के अनुरूप ही की जाए। इसी प्रकार इन संस्थानों में संचालित होने वाले कोर्स भी ऐसे हों जो केवल दिव्यांगों के लिए ही डिजाइन किए गए हों। कुछ कोर्स तो करीब-करीब तैयार भी हो चुके हैं जबकि नए कोर्स पर मंथन चल रहा है। इस बात का विशेष ध्यान रखा जा रहा है कि सभी कोर्स दिव्यांगों को रोजगार की मुख्य धारा में जोड़ने का काम करें।

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पाठ्यक्रम में ये कोर्स होंगे शामिल

दसवीं पास छात्रों के लिए एक साल का कोपा (कंप्यूटर ट्रेनिंग प्रोग्राम) का कोर्स जो 12वीं उत्तीर्ण के समान होगा।

हेयर एंड स्किन केयर भी एक साल का कोर्स होगा, जो कि 12वीं उत्तीर्ण के समकक्ष माना जाएगा।

डेस्कटॉप पब्लिशिंग ऑपरेटर और मेटल कटिंग अटेंडेंट के कोर्स भी एक वर्ष के ही होंगे।

दिव्यांगों के लिए नए आईटीआई के बारे में जानकारी देते हुए निदेशक, प्रशिक्षण और तकनीकी डॉ. पंकज पांडेय ने कहा कि, दोनों आईटीआई सीएम हरीश रावत का विजन हैं। सीएम चाहते हैं कि अशक्त या दिव्यांग भी उसी समाज का अहम हिस्सा हैं जिसमें हम रहते हैं। इसलिए उनको रोजगार से जोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल किया जाए। दोनों आईटीआई बनने से दिव्यांग न केवल तकनीकी रूप से मजबूत होंगे बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर होने में भी मदद मिलेगी।

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