उत्तराखंड में आठ संदिग्ध कैमरे में कैद, अलर्ट के साथ स्कैच जारी

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देहरादून। देशभर में मनाए जा रहे गणतंत्र दिवस समारोह पर खतरे की आशंका के चलते अलर्ट जारी किया गया है। उत्तराखंड में भी गड़बड़ी फैलाने वाले संदिग्धों की सूचना से पुलिस महकमा अलर्ट है। उत्तराखंड के डीजीपी बी एस सिद्धू ने राजधानी दून में एक संदिग्ध के होने की जानकारी देते हुए इसका स्कैच भी जारी किया है। वहीं संदेह के आधार पर पिथौरागढ़ से चार संदिग्धों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। हाल ही में रुड़की के मंगलौर क्षेत्र से चार संदिग्ध आतंकियों की गिरफ्तारी से उत्तराखंड का पुलिस महकमा बेहद सतर्कता बरत रहा है। इन आतंकियों की अर्द्धकुंभ में धमाके की योजना थी। बताया जा रहा है कि खुफिया विभाग ने राजधानी दून में करीब आठ संदिग्ध आतंकियों के आने की सूचना दी है। इस सूचना से पुलिस महकमें में भी हड़कंप मचा हुआ है।

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उत्तराखंड में खतरे की आशंका बढ़ी

राजधानी के विभिन्न स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों में ऐसे आठ संदिग्ध नजर आए हैं। ये चार-चार के ग्रुप में हैं। इनमें से एक का चेहरा भी नजर आ रहा है। वहीं अन्य संदिग्धों ने नकाब पहना था। जिसे देखते हुए पुलिस ने एक का स्कैच भी जारी किया है और लोगों से सतर्कता और सहयोग की अपील की है। इसके अलावा विभिन्न संवेदनशील स्थानों और भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों की सुरक्षा बढ़ा दी है। रेलवे स्टेशन और बस अड्डे में लगातार चेकिंग चल रही है।

इस बीच, सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में भारत नेपाल सीमा पर धारचूला से चार संदिग्ध लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पकड़े गए चारों संदिग्ध देर शाम दिल्ली-धारचूला रोडवेज बस से धारचूला पहुंचे थे। चारों ने नेपाल सीमा पर स्थित पर्यटक आवास गृह में कमरे बुक कराए थे। फिर खाना खाने धारचूला बाजार में एक होटल में गए। इनकी गतिविधियों को देख होटल के लोगों को कुछ शक हुआ और उन्होंने फौरन पुलिस को इसकी सूचना दी। पुलिस पूछताछ में एक ने अपना नाम युसूफ कुरैशी बताया।

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गृह मंत्री को जानकारी ही नहीं

राजधानी में छह से सात संदिग्धों के घुसने की सूचना से जहां हड़कंप मचा हुआ है, वहीं प्रदेश के गृह मंत्री को इस बात की सूचना तक नहीं है। देहरादून में घुसे संदिग्धों के बारे में पूछने पर मंत्री खुद ही हैरान रह गए। प्रीतम सिंह ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। सबसे अहम यही है कि क्या राज्य की पुलिस गृह मंत्री को विश्वास में नहीं लेती, या फिर राज्य की पुलिस गृह मंत्री को सूचना देना जरूरी नहीं समझती है और वो गृहमंत्री से निर्देश लेने के बजाय कहीं और से दिशा-निर्देश लेती है। तालमेल का यह अभाव देवभूमि पर भारी भी साबित हो सकता है।

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