बीजेपी ने बताए वो तीन कारण, जिनकी वजह से उत्तराखंड में लगा राष्ट्रपति शासन !

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नई दिल्ली बहुमत परीक्षण की तय तारीख से एक दिन पहले उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने पर कांग्रेस भड़क गई है। कांग्रेस इसे असंवैधानिक बताते हुए कोर्ट में जाने की बात कह रही है। वहीं वित्त मंत्री अरुण जेटली तीन तर्कों का हवाला देकर राष्ट्रपति शासन के फैसले को सही ठहरा रहे हैं। कपिल सिब्बल ने सवाल उठाया है कि बहुमत परीक्षण से एक दिन पहले राष्ट्रपति शासन की हड़बड़ी क्यों? उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने के पीछे कांग्रेस ने मोदी सरकार की मंशा पर सवाल उठाया। तो जवाबी हमले के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली खुद मोर्चे पर उतर आए।

उत्तराखंड

उत्तराखंड में लगातार संविधान का उल्लंघन हो रहा

एबीपी न्यूज के अनुसार वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि उत्तराखंड में लगातार संविधान का उल्लंघन हो रहा था। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने की मोदी सरकार की सिफारिश के पीछे तीन कारण गिनाए। जेटली के मुताबिक 18 मार्च को वित्त विधेयक पेश करने के दौरान 9 विधायकों की खिलाफत के बाद ही हरीश रावत सरकार अल्पमत में आ गई थी। जेटली के मुताबिक उत्तराखंड विधानसभा के अध्यक्ष गोविंद कुंजवाल ने वित्त विधेयक पर मत विभाजन की मांग को खारिज कर उसे पास बताना भी असंवैधानिक कदम था।

जेटली का दूसरा तर्क

उत्तराखंड में वित्त विधेयक पर सरकार के मंत्री और विधायकों का अविश्वास जताने के मतलब ये वित्त विधेयक पास नहीं हुआ था, इस लिहाज से एक अप्रैल से उत्तराखंड सरकार के पास सरकारी खर्च करने का अधिकार ही नहीं बचता है, जो सबसे बड़ा संवैधानिक संकट है।

जेटली का तीसरा तर्क

कि खरीद-फरोख्त का कथित स्टिंग सामने आने के बाद हरीश रावत नैतिक रूप से भी सरकार में रहने का अधिकार खो चुके थे। वित्त मंत्री अरुण जेटली के तमाम आरोपों के जवाब में कांग्रेस ने उत्तराखंड के राज्यपाल को 18 मार्च को भेजी गई बीजेपी को वो चिट्ठी दिखाई। जिसमें कांग्रेस के नौ बागी विधायकों के नाम भी थे। कपिल सिब्बल ने कांग्रेस विधायकों के इस कदम को पार्टी से स्वैच्छिक इस्तीफा ठहराया…और कहा-दलबदल कानून के तहत ये बागी विधायक तभी अयोग्य साबित हो गए थे।

कांग्रेस ने स्टिंग के आधार पर उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने को भी बचकाना और असंवैधानिक करार दिया। राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए केंद्र पर हमला बोलते हुए कांग्रेस ने कहा कि वह अदालत में फैसले को चुनौती देगी। साथ ही दर्शाएगी कि नरेंद्र मोदी सरकार पार्टी द्वारा शासित सभी राज्यों में सरकारों को ‘अस्थिर’ करने में लगी हुई है। पार्टी के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि राष्ट्रपति शासन उत्तराखंड में सदन में शक्ति परीक्षण से एक दिन पहले लगाया गया। क्योंकि केंद्र जानती था कि मुख्यमंत्री हरीश रावत अपना बहुमत साबित करने में सक्षम होंगे। बीजेपी के तर्कों को खारिज करते हुए कांग्रेस अब राष्ट्रपति शासन के फैसले के खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी में है। दावा ये है कि कोर्ट में मोदी सरकार का ये फैसला नहीं ठहर पाएगा।

 

(एबीपी न्यूज से साभार)

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