उत्तराखंड रोडवेज को है एक साइन का इंतजार

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देहरादून। उत्तराखंड रोडवेज की काहिली और अक्षमता इस बात से समझी जा सकती है कि बीते 12 सालों में हरियाणा से एक काउंटर तक साइन नहीं करा पाये जिससे बसें बंधक होने की स्थिति आ रही है। बता दें कि बीती 10 जनवरी को उत्तरखंड रोडवेज के ग्रामीण डिपो की बसें हरियाणा के आरटीओ ने सीज कर दी थीं। उत्तराखंड रोडवेज की दोनों ही बसें आईएसबीटी, देहरादून से हरियाणा के लिए रवाना हुई थीं जिन्हें एआरटीओ अंबाला ने नारायणगढ़ में परमिट रेनुवल न होने के कारण सीज कर दिया था और जुर्माना लेकर ही छोड़ा। हरियाणा में बसें बंधक बनाए जाने से परिवहन विभाग अधिकारी बौखलाये हुए हैं और घटना का ठीकरा एक दूसरे पर फोड़ रहे हैं।

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उत्तराखंड रोडवेज की कार्यशैली से सीएम भी नाराज

उत्तराखंड से पंजाब जाने वाली बसें यूपी के जमाने के करार पर चल रही हैं। नया करार तो दूर की बात है हरियाणा के रूट से गुजरने के लिए वहां के शासन-प्रशासन से परमिट पर भी दस्तखत नहीं कराए गये हैं। अधिकारियों की आधी-अधूरी तैयारी के साथ जाने की वजह से राज्य गठन के बाद यूपी से करार के संबंध में हुई 12 बैठकें भी फेल साबित हुईं।

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प्रदेश के मुखिया हरीश रावत कई बार रोडवेज के अफसरों से करार के बाबत सख्ती कर चुके हैं, बावजूद इसके विभाग की कार्यशैली सुधरने का नाम नहीं ले रही। उत्तराखंड रोडवेज कई सालों से हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से बसों की आवाजाही और रूट तय करने के संबंध में तैयारी कर रहा है, लेकिन अभी तक कागजी कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी। इन करारों में तेजी लाने के लिये परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक को शासन ने नोडल अधिकारी भी बनाया है लेकिन स्थितियों में सुधार नहीं हुआ। मौजूदा हालातों में हरियाणा की तरह यूपी, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर के रूटों पर चल रहीं उत्तराखंड रोडवेज की बसों को कभी भी कहीं भी रोका जा सकता है।

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पांच सीएम के आदेशों के बाद भी करार नहीं

बीते 12 सालों में पांच मुख्यमंत्रियों ने उन प्रदेशों से करार करने के लिए जोर दिया है जहां प्रदेश की बसों की आवाजाही ज्यादा होती है। रोडवेज के अधिकारी और कर्मचारी कुछ दिनों के लिये तो हरकत में आते हैं लेकिन उसके बाद फिर वही सुस्ती और ढुलमुल रवैय्या अपना लेते हैं। वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक राज्य गठन के बाद राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब और हिमाचल से नया करार हो चुका है, जबकि कई अन्य प्रदेशों के साथ अक्तूबर और नवंबर में बैठक प्रस्तावित हैं। पूरे मामले में परिवहन विभाग के सचिव सीएस नपल्च्याल ने कहा कि विभागीय अधिकारियों से तैयारी पूरी करने को कहा गया है, और बहुत जल्द उन प्रदेशों से भी करार होगा जहां प्रदेश की बसें ज्यादा आती-जाती हैं।

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