उत्तर प्रदेश में सूखा और लातूर जैसे हालात नहीं, नहीं चाहिए पानी

0

नई दिल्ली।  उत्तर प्रदेश में सूखा और मुसीबत झेल रहे बुंदेलखंड इलाके को केंद्र सरकार ने पानी देने की बात कही थी। लेकिन प्रदेश की सपा सरकार ने केंद्र सरकार की इस पेशकश को ठुकरा दिया है।  केंद्र सरकार ने बुंदेलखंड को पानी देने के लिए एक ट्रेन भेजने का फ़ैसला किया था।

उत्तर प्रदेश में सूखा और लातूर जैसे हालत नहीं

उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव आलोक रंजन ने रेल मंत्रालय को भेजे गए एक पत्र में कहा है, हमारे यहां लातूर के जैसे हालात नहीं हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने अपनी चिट्ठी में कहा कि अगर हमें पानी की जरूरत महसूस होगी तब हम रेलवे को सूचित कर देंगे।

बुंदेलखंड में पानी की है किल्लत

उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में पानी की भारी किल्लत है और तमाम रिपोर्टों के बाद केंद्र का ध्यान इस ओर गया है। इलाके में पानी की किल्लत कितनी गंभीर है इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां के कुछ किसान सूखे के कारण अपनी फसलों के नुकसान के चलते कथित तौर पर आत्महत्या कर चुके हैं।

लोग कर रहे हैं पलायन

केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कहा था कि केंद्र का प्रयास है ऐसी रणनीति बनाना जिससे इलाके की पानी की समस्या और गरीबी की समस्या से निजात पाया जा सके। उत्तर प्रदेश में सूखा जैसी समस्या की वजह से लोग यहां से पलायन कर रहे हैं। इस समय मंत्री ने यूपी और मध्य प्रदेश के 10 सांसदों से मुलाकात की थी। ये सभी सांसद बुंदेलखंड इलाके से थे। सूखे एवं पानी की कमी की मार से परेशान बुंदेलखंड की प्यास बुझाने के लिए रेलवे ने पानी के टैंकरों की एक ट्रेन भेजने का फैसला किया था।

बुंदेलखंड में सूखा का व्यापक असर

बुंदेलखंड में उत्तर प्रदेश के बांदा, चित्रकूट, महोबा, ललितपुर और झांसी तथा मध्यप्रदेश के टीकमगढ़, पन्ना, छतरपुर, दमोह एवं सागर जिले शामिल हैं. इन सभी जिलों में पानी का संकट ज्यादा है। इन जिलों में जहां एक तरफ मॉनसून की बारिश में भारी कमी रही है तो वहीं यहां पर अंधाधुंध पत्थर खनन से भूजल स्तर में गिरावट आयी है। अनेक गांवों में पशुओं के लिये पानी एवं चारा भी उपलब्ध नहीं है।

loading...
शेयर करें