एएमयू में भी गूंजेगी टेस्ट ट्यूब बेबी की किलकारी

0

आगरा। अब देश के कुछ गिने चुने मेडिकल कॉलेज की तरह एएमयू में भी टेस्ट ट्यूब बेबी की किलकारी गूंज सकेगी। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, (जेएनएमसी) एएमयू में आगरा रेनबो हॉस्पीटल के सहयोग से आईवीएफ सेंटर खोला गया है। यहां 23 से 25 मई तक बांझपन से पीडित महिला और पुरुष का इलाज किया गया, आठ इम्ब्रियो ट्रांसफर के केस किए गए।

एएमयू

एएमयू यूपी का पहला असिस्टेट रिप्रोडेक्टिव टेक्नोलॉजी वाला सेंटर

इसके साथ ही देश के अन्य मेडिकल कॉलेज की तरह जेएनएमसी, एएमयू के आईवीएफ सेंटर में मरीजों को इलाज मिल सकेगा, निसंतान दंपति के घर में किलकारी गूंज सकेंगी। यह यूपी का पहला असिस्टेट रिप्रोडेक्टिव टेक्नोलॉजी वाला पहला सेंटर बन गया है, जहां रियायती दर पर बांझपन के मरीजों को इलाज मिल सकेगा।

रेनबो हॉस्पिटल के डॉ जयदीप मल्होत्रा और नरेंद्र मल्होत्रा जेएनएमसी के पूर्व छात्र हैं, डॉ जयदीप कॉलेज की सहायक फैकल्टी भी हैं। इन्होंने पीपीपी मॉडल के तहत यहां आईवीएफ सेंटर खोला है। यहां तीन दिन में आठ इम्ब्रियो ट्रांसफर के केस आस्ट्रेलिया से प्रशिक्षण लेकर आए रेनबो हॉस्पिटल के डॉ केशव मल्होत्रा ने किए।

एचओडी प्रो सीमा हाकिम, प्रो शाहीन ने कहा कि एएमयू का सपना पूरा हो गया, यह टीम वर्क है, जिसके कारण यहां आईवीएफ सेंटर शुरू हुआ है। इससे नले बंद होने, पॉलीसिस्टक ओवेरी डिसआर्डर पीसीओडी,शुक्राणु न होने पर इक्सी से वे मां बाप बन सकेंगे।

एएमयू

डॉ जयदीप मल्होत्रा इस मौके पर भावुक हो गई, उन्होंने कहा कि जेएनएमसी से जो सीखा उसी से बुलंदियों पर पहुंचने का मौका मिला। टीम में असिस्टेंट प्रोफेसर तमकिन, प्रो शुकेत, प्रो नून अफशान, प्रो इमाम बानो की टीम ने अंडाणु और शुक्राणु कम होने और इम्ब्रियो ट्रांसफर के केस किए। एएमयू के वीसी प्रो तारीक मंसूर ने टीम को बधाई दी।

loading...
शेयर करें