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एचआईएल ने बढ़ा दिया है भारतीय हॉकी में ग्लैमर और पैसा : सरदार सिंह

नई दिल्ली| हॉकी भारत का राष्ट्रीय खेल है लेकिन देश में यह खेल केवल किताबों में ही अपने गौरवमयी इतिहास को बरकरार रख पाया है। आज के युवाओं की जुबान पर विराट कोहली, महेंद्र सिंह धोनी और सचिन जैसे क्रिकेट खिलाड़ियों का नाम है, लेकिन कम ही लोग होंगे, जिन्हें राष्ट्रीय हॉकी टीम के किसी खिलाड़ी के बारे में कुछ जानकारी हो। लेकिन एचआईएल के बाद से हॉकी का नया रूप-स्वरूप सामने आया है। एचआईएल से खेल को काफी फायदा हुआ है।

एचआईएल से खेल को फायदा

एचआईएल
सरदार सिंह

वर्तमान में एचआईएल के चौथे संस्करण की शुरुआत से पहले एक संवाददाता सम्मेलन मेंआए जेपी पंजाब वारियर्स और भारत की राष्ट्रीय हॉकी टीम के कप्तान सरदार सिंह उर्फ सरदारा सिंह के साथ हुए साक्षात्कार में यह बात समझ में आई कि हॉकी के स्तर में भी विकास हो रहा है। आज इन खिलाड़ियों को भी पहचान मिल रही है। सरदार सिंह ने कहा, एचआईएल के बाद अगर आप हमारी राष्ट्रीय टीम पर नजर डालें, तो सभी खिलाड़ियों को लोग जानने लगे हैं। एचआईएल के परिणाम भारतीय हॉकी के स्तर के लिए काफी सकारात्मक रहे हैं। यूट्यूब पर भी देखा जाए, तो प्रशंसकों की संख्या भी काफी बढ़ी है।”

आर्थिक रूप से भी फायदा

एचआईएल के बाद हॉकी की लोकप्रियता बढ़ने से खिलाड़ियों को भी आर्थिक तौर पर और खेल सुविधाओं के रूप में काफी मदद मिली है। सरदार से जब इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, “इस तरह की लीग को भविष्य में भी जारी रखना चाहिए, क्योंकि इससे आर्थिक फायदे हो रहे हैं, जो खिलाड़ी अपने आप को फिट रख रहे हैं। इससे खिलाड़ियों में आगे बढ़ने के विश्वास और देश के लिए अधिक पदक जीतने के जज्बे को बढ़ावा मिला है।” विश्व हॉकी दिग्गजों में शामिल सरदार से जब रियो ओलंपिक में भारत की रणनीति के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, “फिलहाल, हमने रियो ओलंपिक में क्वालीफाई करने के बाद थोड़ा ब्रेक लिया और अब हम एचआईएल में हिस्सा ले रहे हैं। इसके बाद, जो हमारे कोच और अध्यक्ष रणनीति बनाएंगे, उसके मुताबिक हम आगे बढ़ेंगे।”उन्होंने कहा, ओलंपिक से पहले हमारे लिए अभ्यास स्वरूप टूर्नामेंट मिल रहा है।”इस लीग में खेलने के दौरान हम विदेशी खिलाड़ियों के खिलाफ और साथ खेलने वाले भारतीय खिलाड़ियों के स्तर का अध्ययन करना चाहिए और हम अपनी कमियों में भी सुधार कर सकते हैं।

युवा पीढ़ी को हॉकी में मिला करियर

आज की युवा पीढ़ी भी हॉकी को एक करियर के तौर शामिल करने के लिए आगे बढ़ रही है। इस बारे में सरदार ने कहा, “इस लीग के बाद जो परिणाम आ रहे हैं, मैं कहूंगा कि हॉकी के प्रति युवा पीढ़ी के विचार सकारात्मक हुए हैं। पहले अधिकतर लोग क्रिकेट में हिस्सा लेने की कोशिश करते थे, लेकिन अब लोग हॉकी में शामिल होने के प्रति रुचि दिखा रहे हैं, जो कि बहुत अच्छी बात है।” उल्लेखनीय है कि ओलंपिक में आठ ओलंपिक स्वर्ण पदक जीत चुकी भारतीय टीम की पहचान धुंधली पड़ने लगी थी, लेकिन एचआईएल ने कहीं न कहीं इस पहचान को बढ़ाने में एक मुख्य भूमिका निभाई है।

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