एचडीएफसी बैंक पर पड़ी नोटबंदी की मार, तीन महीने में 4500 कर्मचारियों को किया बाहर

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दिल्ली। एचडीएफसी बैंक की आय में गिरावट आने के बाद बैंक ने एक बड़ा कदम उठाते हुए करीब 45 सौ कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। पिछले 18 साल में पहली बार ऐसा हुआ है कि बैंक की आय में इतनी बड़ी गिरावट आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी बैंक द्वारा एक तिमाही में इतनी बड़ी छंटनी का यह पहला मामला है, जो आगे भी जारी रह सकता है अगर स्थितियां नहीं सुधरीं।

एचडीएफसी बैंक

एचडीएफसी बैंक की आय में हुई भारी गिरावट

बैंक ने संकेत दिया है कि उसका फोकस फिलहाल उत्पादकता पर है और भविष्य में हायरिंग में गिरावट रहने वाली है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर 2016 में बैंक में 95,002 कर्मचारी थे, जो दिसंबर में 5 प्रतिशत घटकर 90,421 तक आ गए। दाइवा कैपिटल मार्केट्स के रिसर्च प्रमुख पुनीत श्रीवास्तव का कहना है कि ये नौकरियां ज्यादातर खुदरा क्षेत्र में बैंक की परिसंपत्ति निर्माण से जुड़ी होती हैं और उदासीनता या छंटनी किसी व्यापार का एक हिस्सा है। लेकिन मैं इसे एक बैंक द्वारा किसी एक तिमाही में इतनी बड़ी छंटनी करार नहीं देता।

मंगलवार को एचडीएफसी बैंक ने कहा कि उसका नेट प्रॉफिट 15 प्रतिशत बढ़कर 3,865 करोड़ रुपये हो गया, जो एक साल पहले 3,357 करोड़ रुपये था। लेकिन यह जून 1998 से उसकी सबसे न्यूनतम प्रॉफिट ग्रोथ है। बॉन्ड और करंसी में प्री-टैक्स प्रॉफिट भी 253 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले साल 513 करोड़ था।

नोटबंदी के बाद बैंकों की फी इनकम भी सिर्फ 9.4 प्रतिशत ही बढ़ी है। बैंक के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर परेश सुखतांकर ने बताया कि छंटनी कर्मचारियों की उत्पादकता और उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने का एक नियमित हिस्सा है। मंगलवार को जारी हुए नतीजों में कहा गया कि बैंक के परिचालन खर्च में 0.55 प्रतिशत की गिरावट आई है और दिसंबर के अंत में यह 4.843 करोड़ रह गया, जो सितंबर में 4, 870 करोड़ रुपये था। इसके अलावा बाकी परिचालन खर्च भी 1.83 प्रतिशत गिरकर 3,154 करोड़ पर आ गया। सितंबर में यह 3,213 करोड़ रुपये था। हालांकि कर्मचारी लागत में 1.93 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 1,689 करोड़ से 1,657 करोड़ तक आ गया।

Edited by- Shailendra verma

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