चीन और पाकिस्तान के सपोर्ट के बिना मिल सकती है भारत को NSG मेंबरशिप

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नई दिल्ली। परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की सदस्यता के लिए इसके दो महत्वपूर्ण सदस्यों मेक्सिको और स्विट्जरलैंड से पुरजोर समर्थन मिलने के बाद भारत के राजनयिक प्रयास सफल होते दिख रहे हैं। तो वहीं दूसरी ओर  चीन ने एक बार फिर इसका विरोध किया।

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एनएसजी

एनएसजी में भारत की सदस्‍यता पर चीन ने कड़ा किया रुख

चीन की आड़ लेकर पाकिस्तान भारत की एनएसजी में एंट्री का विरोध कर रहा है। पाक और चीन का तर्क है कि बिना नॉन-प्रोलिफिरेशन ट्रीटी (परमाणु अप्रसार संधि-NPT) पर साइन किए बिना भारत कैसे एनएसजी की मेंबरशिप हासिल कर सकता है?
अमेरिकी अखबार ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने भी हाल ही अपने एडिटोरियल में लिखा था, “भारत तब तक एनएसजी मेंबरशिप पाने का हकदार नहीं होगा, जब तक वह सभी मानकों पर खरा नहीं उतर जाता।”

चीन के सपोर्ट के बिना मिल सकती है एनएसजी मेंबरशिप

माना जा रहा है कि अमेरिका, स्विट्जरलैंड और मेक्सिको के सपोर्ट के बाद भारत को NSG की मेंबरशिप मिल सकती है।

-वॉशिंगटन में भारत-अमेरिका के ज्वाइंट स्टेटमेंट मुताबिक, “दोनों लीडर भारत की मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (MTCR) में एंट्री को बेहतरी के रूप में देखते हैं। प्रेसिडेंट ओबामा एनएसजी मेंबरशिप को लेकर भारत की एप्लिकेशन का वेलकम करते हैं।”
– “अमेरिका इस बात को दोबारा कन्फर्म करता है कि भारत मेंबरशिप के लिए तैयार है। हम दूसरे देशों से भी अपील करते है कि इस महीने होने वाली NSG प्लेनरी की मीटिंग में वे भारत को सपोर्ट करें।”

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एनएसजी सदस्यता के लिए भारत को मेक्सिको का भी समर्थन 

मोदी की छह जून को जेनेवा यात्रा के दौरान स्विट्जरलैंड ने भी इस मामले में भारत के प्रति अपना समर्थन जताया था।इन दोनों देशों के सहयोग के साथ अमेरिका का भी एनएसजी मामले में पुरजोर समर्थन बना हुआ है। इससे NSG में भारत की दावेदारी मजबूत होगी।

एनएसजी वैश्विक स्तर पर परमाणु व्यापार को नियमित करने वाली संस्था है।एनएसजी में भारत की सदस्यता को लेकर यह सहयोग सही समय में मिला है। नौ से 10 जून के दौरान जेनेवा में एनएसजी की बैठक के दौरान भारत के आवेदन पर विचार हो सकता है। एनएसजी की अगली बैठक 24 जून को सियोल में होगी।

भारत एक अन्य महत्वपूर्ण बहुपक्षीय निर्यात नियंत्रण संगठन मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (एमटीसीआर) का भी सदस्य बनने की कगार पर पहुंच गया है।एमटीसीआर की सदस्यता एनएसजी में भारत के प्रवेश पर मुहर लगा सकती है।

भारत चार बहुपक्षीय निर्यात नियंत्रण व्यवस्थाओं एनएसजी, एमटीसीआर, वासेनार प्रबंधन और आस्ट्रेलिया समूह की सदस्यता की मांग करता रहा है। उच्च प्रौद्योगिकी और संवेदनशील सैन्य दोहरी प्रौद्योगिकी के लगभग सभी प्रमुख आपूर्तिकर्ता इनके सदस्य हैं।

मोदी ने अपने यात्रा कार्यक्रम के आखिरी पलों में मेक्सिको और स्विट्जलैंड को शामिल किया था। पहले वह अफगानिस्तान, कतर और अमेरिका की ही यात्रा करने वाले थे। भारत को एनएसजी का सदस्य बनाने के लिए अमेरिका से भी समर्थन मिला है। राष्ट्रपति बराक ओबामा ने मोदी के अमेरिका दौरे के दौरान मंगलवार को अमेरिकी समर्थन को व्यक्त किया था। भारत को पहले से ही एनएसजी के अन्य प्रमुख देशों, फ्रांस, रूस और ब्रिटेन से समर्थन मिल चुका है।

 

 

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