मोदी के दोस्त ओबामा ने पूरा किया वादा, अब NSG में भारत की एंट्री कोई नहीं रोक सकता

0

नई दिल्ली। बीते दिनों भारत को एनएसजी में शामिल न होने के लिए चीन ने अड़ंगा लगाया था। चीन की वजह से भारत उस समय तो एनएसजी में शामिल नहीं हो सका था, लेकिन अब एक बार फिर भारत को एनएसजी की सदस्यता दिलाने के लिए अमेरिका ने कोशिश शुरू कर दी है। राष्ट्रपति बराक ओबामा ने चीन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। बता दें अमेरिका लगातार भारत के साथ खड़ा हुआ है और एनएसजी की सदस्यता दिलाने की पूरी कोशिश कर रहा है।

यह भी पढ़ें : कश्मीर में फिर हुआ आतंकी हमला – भारतीय सेना ने दो आतंकियों को मार गिराया, जंग जारी

एनएसजी में शामिल

एनएसजी में शामिल करने के लिए भारत के साथ है अमेरिका

प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के बीच प्रगाढ़ संबंधों का असर दोनों देशों के रिश्तों पर साफ दिख रहा है। हिंदुस्तान ने न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप यानि NSG में शामिल होने की काफी कोशिश की। मगर चीन के वीटो के कारण वो कामयाब नहीं हो पाया। एनएसजी के मुद्दे पर भी अमेरिका ने खुल कर पीएम मोदी का साथ दिया। एमटीसीआर में तो हिंदुस्तान शामिल हो गया लेकिन एनएसजी में शामिल होना अभी भी बाकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा अगले साल जनवरी के बाद रिटायर हो जाएंगे। जाते-जाते वो पीएम मोदी से किया वादा निभा कर जाएंगे। इस बात के संकेत उन्होंंने दे दिए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने खुद इस बात की जानकारी दी है। उन्होने कहा कि अमेरिका न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप में हिंदुस्तान की सदस्यता का पुरजोर समर्थन करेगा।

यह भी पढ़ें : राहुल और सिद्धू ने दिल्ली में की सीक्रेट मीटिंग, हो सकता है बड़ा ऐलान

लाओस में दोनों नेताओं के बीच आसियान सम्मेलन के दौरान मुलाकात हुई थी। जहां दोनों नेताओं ने असैन्य परमाणु सहयोग और जलवायु परिवर्तन से लड़ने के साथ-साथ सैन्य भागीदारी को मजबूत करने पर चर्चा की। उसी दौरान NSG का भी मुद्दा उठा। जिस पर अमेरिका ने हिंदुस्तान को पूरा समर्थन देने की बात कही है। पीएम मोदी ने अपने ट्वीट में लिखा है कि ‘भारत और अमेरिका के रिश्तों पर अमेरिका के राष्ट्रपति ओबामा के साथ विस्तार से चर्चा हुई। दोनों नेताओं के बीच ये आठवीं मुलाकात थी। इसी से साफ हो रहा है कि अमेरिका के लिए हिंदुस्तान की अहमियत क्या है।

यह भी पढ़ें : GSAT-18 का ISRO ने किया सफल प्रक्षेपण, मोदी ने वैज्ञानिकों को दी बधाई

एनएसजी का मतलब क्या है

न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप मई 1974 में देश के न्यूक्लियर टेस्ट के बाद बनाया गया था। इस ग्रुप में 48 देश हैं। इनका मकसद न्यूक्लियर वेपन्स और उनके प्रोडक्शन में इस्तेमाल हो सकने वाली टेक्नीक, इक्विपमेंट और मटेरियल के एक्सपोर्ट को रोकना या कम करना है। 1994 में जारी एनएसजी गाइडलाइन्स के मुताबिक, कोई भी सिर्फ तभी ऐसे इक्विपमेंट के ट्रांसफर की परमिशन दे सकता है, जब उसे भरोसा हो कि इससे एटमी वेपन्स को बढ़ावा नहीं मिलेगा। एनएसजी के फैसलों के लिए सभी मेंबर्स का समर्थन जरूरी है। हर साल एक मीटिंग होती है।

loading...
शेयर करें