कैशलेस खरीदारी करने पर अभी भी MDR का पैसा डकार रहे हैं दुकानदार

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देहरादून। मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर पर आरबीआई से साफ निर्देश न आने पर ग्राहक व बैंकों के कई अधिकारी काफी असमंजस में हैं। आठ नवम्बर को केंद्र सरकार द्वारा की गई नोटबंदी के बाद से 31 दिसंबर 2016 तक आरबीआई ने डेबिट कार्ड पर ट्रांजेक्शन चार्ज बंद कर दिया था, लेकिन एक जनवरी से यह नियम हटा दिया गया। जिसके बाद से शहर में अलग-अलग दुकानदारों ने इस चार्ज को लेकर अलग-अलग नियम लागू कर लिए।

एमडीआर चार्ज

एमडीआर चार्ज दुकानदार ही करते हैं वहन

सिर्फ इतना ही नहीं, आरबीआई के एक नियम के अनुसार, एमडीआर चार्ज आमतौर पर दुकानदार ही वहन करते हैं लेकिन कई दुकानदारों ने नोटबंदी के बाद से ग्राहकों से यह पैसा लेना शुरू कर दिया है। मर्चेंट डिस्काउंट रेट हर बैंक में अलग-अलग होता है। बता दें, एक हजार रुपये तक के डेबिट कार्ड ट्रांजेक्शन पर 0.25 प्रतिशत यानी 2.50 रुपये चार्ज है।

बैंक की प्वाइंट ऑफ सेल यानी पीओएस मशीन इस्तेमाल करने पर बैंक एमडीआर चार्ज मर्चेंट से लेता है, लेकिन नोटबंदी के बाद से कई दुकानदार ग्राहकों से इसकी वसूली कर रहे हैं, जबकि कुछ दुकानदार ऐसे भी है जो इस चार्ज को खुद वहन कर रहे हैं।

उधर, इस पूरे मामले में कुछ बैंक कर्मचारियों का कहना है कि एमडीआर चार्ज आमतौर पर दुकानदार ही वहन करते हैं लेकिन कई दुकानदार ने नोटबंदी के बाद से ग्राहकों से यह पैसा लेना शुरू कर दिया है। हालांकि यह वसूली सही है या नहीं, इसे लेकर अभी तक आरबीआई से साफ निर्देश नहीं मिले हैं।

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