‘एम्स की जमीन को बेमतलब विवादित बता रहे नेता’

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गोरखपुर। केन्द्र सरकार द्वारा यह स्पष्ट होने के बाद कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जनपद के खुटहन में ही अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की स्थापना की जाएगी, स्थानीय सियासत फिर गरम हो गई है। पूर्व मंत्री स्वर्गीय जमुना प्रसाद निषाद के बेटे और खुटहन निवासी सपा नेता अमरेंद्र निषाद ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि खुटहन में एम्स के लिए प्रस्तावित 200 एकड़ जमीन पर कोई विवाद नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार से जुड़े कुछ जनप्रतिनिधि ही इस मामले में राजनीति कर रहे हैं और लोगों को गुमराह कर रहे हैं। अमरेंद्र ने दावा किया है कि अगर किसी को शक है तो वह स्थानीय डीएम से पता कर सकता है। खुटहन की जमीन पर कोई विवाद नहीं है।

 एम्स

बिना नाम लिये अमरेंद्र ने भाजपा सांसद महंत योगी आदित्यनाथ पर कड़ा कटाक्ष किया है। उन्होंने कहा है कि गुमराह करने वाले कदम इसलिये उठाए जा रहे हैं क्योंकि अगर एम्स गोरखपुर में बन जाएगा तो उनके जो हॉस्पिटल चलते हैं कहीं उस पर असर न पड़ जाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को 200 एकड़ जमीन के बारे में अमरेंद्र ने ही बताया था और उसके बाद सीएम ने अधिकारियों की टीम भेजकर सर्वे कराया गया था। अब उस जमीन पर पीएमओ की भी मोहर लग चुकी है।

बंद हो राजनीति

सपा नेता अमरेंद्र निषाद ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों से अनुरोध किया है कि वे एम्स को लेकर राजनीति करना बंद कर दें क्योंकि अगर राजनीति हुई तो इसका असर गरीब जनता को भोगना पड़ेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जमीन को लेकर कोई विवाद नहीं है। केंद्र सरकार एम्स बनाएगी तो खुटहन में प्रदेश सरकार सभी मानकों को पूरा करेगी।

खूब हो रहे सियासी हमले

भाजपा सांसद महंत योगी आदित्यनाथ का लगातार दावा रहा है कि एम्स बनने में सबसे बड़ी बाधा प्रदेश सरकार है। उन्होंने इसके खिलाफ पिछले महीने गोरखपुर शहर में पदयात्रा भी निकाली थी। उनका कहना है कि चूंकि प्रदेश सरकार ने मानक के अनुरूप जमीन मुहैय्या नहीं कराया यही वजह है कि गोरखपुर में एम्स स्थापना का काम नहीं शुरू हो पा रहा है। सांसद के कार्यक्रम के बाद समाजवादी पार्टी ने भी जनपद के सभी प्रमुख स्थानों पर जुलूस और धरना-प्रदर्शन के जरिये प्रभावी विरोध दर्ज कराया था। इस बीच, कांग्रेस के नेता राणा राहुल सिंह भी गोरखपुर में एम्स की स्थापना को लेकर एक गैर राजनीतिक मंच के बैनर तले 26 दिनों से सत्याग्रह पर हैं। यह सत्याग्रह कमिश्नर कार्यालय पर 15 अप्रैल को शुरू हुआ था।

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