एम्स के लिए सड़क पर उतरे योगी, ‘सत्याग्रह’ भी जारी है…

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गोरखपुर। यूपी के गोरखपुर में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की स्थापना को लेकर एक बार फिर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस के एक युवा नेता ने गैर राजनीतिक बैनर तले मंडलायुक्त कार्यालय पर 15 मार्च से सत्याग्रह शुरू किया और अब भारतीय जनता पार्टी भी इस आंदोलन में कूद गई है। भाजपा के फायरब्रांड सांसद महंत योगी आदित्यनाथ की अगुआई में पार्टी के अलावा हिन्दूवादी संगठनों के हजारों लोगों ने सोमवार को पदयात्रा निकाली। पदयात्रा का मकसद गोरखपुर में एम्स की स्थापना की मांग के साथ-साथ प्रदेश सरकार के उस गलतबयानी के खिलाफ लोगों को जागरूक करना था जिसमें एम्स स्थापना की बाधा के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार माना जा रहा है।

एम्स

गोरखपुर रेलवे स्टेशन स्थित महाराणा प्रताप की मूर्ति से शुरू हुई पदयात्रा शहर के प्रमुख मार्गों और गोलघर से होती हुई दोपहर बाद तक डीएम कार्यालय पहुंची। वहां डीएम कार्यालय के माध्यम से पत्रक देते हुए एम्स स्थापना के लिए गोरखपुर में जमीन की मांग की गई। पदयात्रा में नगर विधायक डा. राधामोहन दास अग्रवाल, मेयर डा. सत्या पाण्डेय और पूर्व मेयर अंजू चौधरी के अलावा भाजपा और हिन्दू संगठनों के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।

प्रदेश सरकार की नियत साफ नहीं

भाजपा सांसद महंत योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में एम्स स्थापना के लिए सबसे बड़ी बाधा प्रदेश सरकार को बताया है। उनका कहना है कि इस मामले में सरकार की नियत साफ नहीं है। उन्होंने विस्तार से जानकारी दी और बताया कि प्रदेश सरकार गोरखपुर में उचित जमीन ही नहीं उपलब्ध करा रही है। सरकार ने जो भी जमीन केन्द्र को उपलब्ध कराने का दावा किया वे मानक के अनुसार नहीं हैं। उल्टे गलतबयानी करके केंद्र सरकार को बदनाम किया जा रहा है।

सत्याग्रह दोनों के खिलाफ

कांग्रेस के युवा नेता राणा राहुल सिंह की अगुआई में मंडलायुक्त कार्यालय पर 15 मार्च से एम्स सत्याग्रह चल रहा है। इस सत्याग्रह के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकार को निशाने पर लिया गया है। हांलाकि आंदोलन का स्वरूप गैर राजनीतिक है। सत्याग्रह को दर्जनों संगठनों ने समर्थन किया है। सत्याग्रहियों का आरोप है कि केन्द्र और राज्य की सरकारें एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाकर एम्स के मुद्दे पर गोरखपुर को छलना चाहती हैं।

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