एक्शन, इमोशन और देशभक्ति का Best Combination है ‘एयरलिफ्ट’

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फिल्म का नाम: ‘एयरलिफ्ट’

डायरेक्टर: राजा कृष्णा मेनन

स्टार कास्ट: अक्षय कुमार, निम्रत कौर, पूरब कोहली, कुमुद मिश्रा, लेना, इनामुल हक

रेटिंग: 3.5 स्टार

अक्षय कुमार की फिल्म ‘एयरलिफ्ट’ रिलीज़ हो चुकी है। राजा कृष्णा मेनन द्वारा निर्देशित ये फिल्म सच्ची घटना पर आधारित है। इराक-कुवैत युद्ध के दौरान कुवैत में फंसे भारतीयों को वहां से बाहर निकालने के अभियान से जुड़े एक बेनाम हीरो की कहानी पर बनी है एयरलिफ्ट। आइये जानते हैं आखिर क्या है ‘एयरलिफ्ट’ की कहानी।

‘एयरलिफ्ट’

‘एयरलिफ्ट’ की कहानी

यह कहानी कुवैत में रहने वाले भारतीय मूल के बिजनेसमैन रंजीत कटियाल (अक्षय कुमार) की है। रंजीत अपनी बीवी अमृता कटियाल (निम्रत कौर) और बच्ची के साथ कुवैत में रहते हुए अच्छा कारोबार कर रहा होता है। रंजीत उन भारतीय मूल के लोगों में से है जिसे भारत वापसी करने में कोई भी इंट्रेस्ट नहीं है और सिर्फ मुनाफे का काम करते हुए कहानी आगे बढ़ती है। कई मोड़ लेते हुए अचानक से इराक और कुवैत के बीच जंग छिड़ जाती है जिसकी वजह से वहां मौजूद भारतीय मूल के लोगों को युद्ध के दौरान भारत वापस भेजे जाने की कवायद शुरू हो जाती है। रंजीत कटियाल खुद ना जाकर वहां मौजूद 1 लाख 70 हजार भारतीयों को देश वापसी कराने पर ध्यान देता है, इस दौरान कई घटनाएं भी घटती हैं।

स्क्रिप्ट

फिल्म की स्क्रिप्ट असल जिंदगी की घटना पर आधारित है। जिसके राइटर डायरेक्टर राजा कृष्णा मेनन ने सुरेश नायर, राहुल नांगिया, और रितेश शाह के साथ मिलकर बहुत अच्छा ड्राफ्ट लिखा है, युद्ध के दौरान जब इराक की सेना कुवैती लोगों को मार रही थी उस दौरान भारतीयों और कुवैतियों में अंतर को कैसे पहचाने, उसे भी राजा ने अच्छे ढंग से दर्शाया है। फिल्म की सिनेमेटोग्राफी भी कमाल की है जिसके लिए प्रिया सेठ बधाई की पात्र हैं। वैसे तो फिल्म की शुरुआत के 5 मिनट आपको बांध देते हैं लेकिन फर्स्ट हाफ में कहानी धीरे धीरे फैलने लगती है, जिसे थोड़ा टाइट किया जा सकता था। लेकिन फिल्म का सेकंड हाफ फास्ट और दिलचस्प है, जो आपको फिर से बांधे रखता है। फिल्म के आखिर में क्रेडिट्स के दौरान आने वाली जानकारियां भी एक अच्छा प्रभाव छोड़कर जाती हैं।

डायरेक्शन

राजा कृष्ण मेनन की मेहनत फिल्म में साफ दिखाई देती है। उन्होंने छोटी -छोटी बातों का ध्यान रखा। जैसे कि जब इराक और कुवैत के बीच युद्ध हुआ था, तब सचिन तेंडुलकर कैसे दिखते थे। इसे समझाने के लिए उन्होंने उस समय के सचिन के शॉट फिल्म डाले हैं।

एक्टिंग

अक्षय, निमरत कौर के पहले कोस्‍टार रहे हैं और दोनों की जुगलबंदी बेहतरीन नजर आई। फिल्‍म में इमोशनल सीन हों या नेगोशिएशन की भूमिका को जीना, दोनों ही रूपों में सीन दर सीन दोनों का अभिनय निखरता गया है। दरअसल फिल्‍म के हालात लार्जर दैन लाइफ वाले हैं। हजारों लाखों लोगों की जिंदगी से जुड़े किरदार के खास कनेक्‍शन के चलते फिल्‍म में दोनों का अभिनय उभरकर सामने आता है। लंच बॉक्‍स के बाद निमरत को रियलिस्‍टिक सिनेमा में देखना उनके फैंस को पसंद आएगा। अक्षय को अरबी भाषा में संवाद करते हुए देखना, भावनात्मक सीन में शानदार अभिनय औऱ शार्पमाइंड के गजब के नेगोशिएटर के रुप में देखना उनके फैंस को पसंद आएगा।

म्यूजिक

फिल्‍म में कुल चार गाने हैं। वार जोन की कहानी कहती फिल्‍म में अमाल मलिक ने संगीत दिया है। ‘तू भूला जिसे..’ के के की आवाज में देशभक्ति राग जगाने वाला गाना है, तो ‘सोच ना सके..’ सोलो सांग है। इसके अलावा ‘हबीबी’ अच्छा है। बैकग्राउंड स्कोर ठीक-ठाक है।

देखें या नहीं
अगर आप अक्षय कुमार के फैन हैं और एक सच्ची घटना पर बेस्ड अच्छी फिल्म देखना चाहते हैं तो एयरलिफ्ट जरूर देखें।

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