एसजीपीजीआई बहुत जल्द बनेगा सेंटर आफ एक्सीलेंस

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में चिकित्सा के आधारभूत ढांचे के विकास के लिए एक नये माडल को लाने जा रही है। चिकित्सा शिक्षा के प्रमुख सचिव अनूप पांडे ने बताया कि राष्ट्रीयकृत बैंक से लोन के जरिये स्वास्थ्य के क्षेत्र में नयी सुविधाओं का विकास किया जाएगा। इस माडल का लाभ उठाने वाला संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इन्स्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज पहला संस्थान होगा। उन्होंने कहा कि एसजीपीजीआई को सेंटर आफ एक्सीलेंस बनाने के लिए त्रिपक्षीय समझौता हो चुका है।

एसजीपीजीआई

एसजीपीजीआई में अब ऐसा क्या होने जा रहा है

473 करोड़ के इस प्रस्ताव में राज्य को इमरजेंसी मेडिसिन काम्प्लेक्स के रूप में विकसित करना, आने वाले मरीजों के लिए नये बाह्य रोग विभाग खोलना, पुराने बाह्यरोग विभागों को 180 बेड के अस्पतालों में बदलना, रोबोटिक सर्जरी सेंटर का विकास करना, न्यूरो सर्जरी सेंटर आदि शामिल हैं।

चिकित्सा शिक्षा विभाग के सूत्रों का कहना है कि स्टेट बैंक पहले से इस लोन को सिद्धान्ततः मंजूरी दे चुका है। क्योंकि यह सुरक्षित लोन है। इसके अलावा चिकित्सा शिक्षा विभाग और वित्त विभाग के अन्य प्रस्तावों को भी मंजूरी मिल चुकी है। श्री पांडे ने भी कहा कि अब बस कुछ औपचारिकताएं पूरा किया जाना बाकी है।

इस प्रोजेक्ट में राज्य सरकार गारण्टर की भूमिका में रहेगी। एसजीपीजीआई 80 करोड़ हर साल के हिसाब से कर्ज अदा करेगा। जिसमें से 50 करोड़ अपनी आय से जुटा कर देगा जबकि शेष सरकार के अनुदान से पूरा किया जाएगा।

स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यह जनता, राज्य सरकार और एसजीपीजीआई तीनों के लिए बल्ले बल्ले यानी खुशी की बात होगी। राज्य सरकार को अपनी जेब से कुछ देना नहीं पड़ेगा। जनता को लाभ मिलेगा। पीजीआई बड़ा सेंटर हो जाएगा।

उप्र के पूर्व स्वास्थ्य महानिदेशक एलबी प्रसाद का कहना है कि एसजीपीजीआई को अब आत्मनिर्भरता की ओर भी कदम बढ़ाने चाहिए।

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