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कंडोम का इतिहास साढ़े चार सौ साल पुराना, जानिए ये होते कैसे-कैसे थे

नई दिल्ली। क्या आप कंडोम का इतिहास जानते हैं? इस सवाल पर जवाब देना उतना ही मुश्किल होगा, जितना आसान कंडोम का इस्तेमाल करना। लेकिन कंडोम का अतीत साढ़े चार सौ साल पुराना है। इतिहास के पन्नों में दर्ज कंडोम के बारे में जानकर आप हैरान रह जाएंगे। कंडोम का इतिहास गोल्डेन पीरियड की तरह था। उस दौर में एक कंडोम को जितनी बार चाहे इस्तेमाल कर सकते थे। आज अव्वल दर्जे के कंडोम भी यह काबिलियत नहीं रखते। कंडोम का इतिहास देखने पर पता चलता है कि इटली के भौतिक विज्ञानी गेब्रियल फेलोपियस ने साल 1564 में पहली बार कंडोम जैसी चीज को इस्तेमाल करने की सलाह दी थी।

कंडोम का इतिहास

कंडोम का इतिहास

गेब्रियल ने ऐसी लिनेन की परत का इस्तेमाल करने की पैरोकारी की, जिसमें सोखने की क्षमता हो। साथ ही साथ यह सिफलिस जैसी बीमारियों से भी बचाता हो। असुरक्षित यौन संक्रमण से सिफलिस होने का खतरा रहता है। इस स्थिति में पीडि़त का शरीर धब्बेदार होता जाता है और धीरे-धीरे गलने लगता है।

इसके बाद साल 1605 में कैथोलिक पादरी लियोनार्डस लेसिअस ने कंडोम के इस्तेमाल को वैध घोषित किया था। हालांकि उस दौर में कैथोलिक चर्चों ने उनकी बात को ज्यादा तवज्जो नहीं दी थी।

सन् 1600 में पहली बार कंडोम का इस्तेमाल नए तरीके से किया गया। यह कंडोम जानवरों की अांतों से बना था। इसकी खूबी थी कि चाहे जितनी बार इस्तेमाल करिए, यह खराब नहीं होगा। हालांकि इसकी कीमत काफी ज्यादा हुआ करती थी।

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किताबों में कंडोम का इतिहास खोजने पर पहली बार इसका इस्तेमाल सन् 1839 में देखने को मिला। चार्ल्स गुडवियर ने पहली बार रबर कंडोम का आविष्‍कार किया। आप उन्हें कंडोम का जनम भी मान सकते हैं।

इसके बाद सन् 1919 में पहला लेटेक्स कंडोम बनाया गया। इसे फ्रेडरिक कीलियन ने बनाया। साल गुजरे और वक्त बदला। कंडोम का प्रचलन बढ़ने लगा। 1931 में अमेरिकी आर्मी में कंडोम का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा। एक दौर आया, जब आर्मी में किसी के पास कण्डोम होने से उसकी ऊंची हैसियत का पता चलता था।

यही वह वक्त था, जब कंडोम पर पहली बार एड भी बने। यह एड हालांकि किसी टीवी या रेडियो पर नहीं सुनने को मिलते थे। आमी के लोगों के बीच यह एड काफी प्रचलित था। आप भी इसे पढ़ना चाहेंगे… हाजिर है- “Don’t forget, put it on before you put it in.”

धीरे-धीरे कंडोम का प्रचलन आम लोगों के बीच भी बढ़ गया। साल 1957 में कंडोम कंपनी ड्यूरेक्स ने पहली बार लुब्रिकेटेड कंडोम इजाद किया। फिर 1979 में कंडोम को विरोध भी झेलना पड़ा। अमेरिकी कानून ने इसके विज्ञापनों पर रोक लगा दी। अमेरिका भले ही आधुनिक देशों में गिना जाता है लेकिन उसका यह कदम क्या आपको पिछड़ी सोच का नहीं लगता।

कण्डोम की घटती लोकप्रियता को जानलेवा बीमारी एड्स ने संजीवनी दी। 1980 में जब एड्स का नाम पहली बार सुनने में आया तो कंडोम की जरूरत महसूस होने लगी। बाजार में माहौल बना कि कंडोम का इस्तेमाल करने से एड्स का वायरल एचआईवी नहीं फैलता। इसके बाद कंडोम की बिक्री ने दुनिया की हर चीज की खरीद-फरोख्त के सारे रिकॉर्ड तोड़ डाले।

1990 तक कंडोम का बाजार रंगीन हो गया। बाजार में फ्लेवर्ड, कलर्ड और रिब्ड कण्‍डोम आने लगे। इन्होंने भी बाजार में धूम मचाई और आज भी मचा रहे हैं। बात यहीं खत्म नहीं हुई। 1991 में डेनिश कंपनी लेस हेसल ने महिलाओं के लिए भी कंडोम ‘फेमीडोम’ बनाकर इतिहास रच दिया। अब तक सिर्फ पुरुष ही इसका इस्तेमाल कर सकते थे, लेकिन अब महिलाएं भी इस मजेदार मौके पर पूरा फायदे उठाने के लिए आजाद थीं।

समय के साथ-साथ कंडोम की स्वीकार्यता बढ़ी तो 1997 में ड्यूरेक्स ने कंडोम और इसके इस्तेमाल से जुड़ी अपनी वेबसाइट बना डाली। यह कंडोम पर बनी पहली आधिकारिक वेबसाइट थी।

इसके बाद तो जैसे कंडोम का बाजार ऐसा खुला कि दुनिया ही इसमें समा गई। साल 2011 में ऑरिगेमी कंडोम बनाए गए। इनका ट्रायल भी किया गया। कंडोम की इस नई नस्ल का इस्तेमाल भी नए तरीके से होता है। इसके लिए बेहतर होगा कि आप गूगल बाबा पर ऑरिगेमी कंडोम सर्च करें।

कंडोम अब तक समाजसुधारकों से भी जुड़ चुके थे। साल 2013 में बिल गेट्स के गेट्स फाउंडेशन ने नए दौर के कंडोम बनाने के लिए एक मिलियन डॉलर दान में दिए। नए दौर के ये कंडोम बेहद पतले और इंसान की चमड़ी के रंग के होंगे। यह कंडोम बहुत हद तक वह पुराना वक्त याद दिलाएंगे, जब एक कंडोम को जितनी बार चाहे इस्तेमाल किया जा सकता था।

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