कठुआ गैंगरेप मामले में आया नया मोड़, हुआ चौंका देने वाला खुलासा

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में हुए कठुआ गैंगरेप मामले को लेकर अभी तक यही बताया जा रहा है कि इस घटना की साजिश मंदिर के पुजारी सांजी राम ने रची थी और इसे उसके भतीजे, बेटे सहित पांच आरोपियों ने अंजाम दिया था। लेकिन इस घटना को लेकर अब जो खुलासा हुआ है, उसे सुनकर किसी के भी होश फाक्ते हो जाएंगे। दरअसल, इस घटना में जिसे अभी तक साजिशकर्ता समझा जा रहा था, मासूम को उसी ने मौत के घाट उतारा था।

मिली जानकारी के अनुसार, पूछताछ के दौरान घटना के मुख्‍य अभियुक्‍त सांजी राम ने खुलासा करते हुए बताया कि आखिर किस तरह उसे अगवा किया गया, उसके बाद उससे रेप और फिर उसकी हत्‍या कर दी गई। उसने बताया कि यह सब कुछ चार दिनों के भीतर हुआ।

कठुआ गैंगरेप मामले में जानकारी देते हुए जांचकर्ताओं ने बताया है कि आरोपियों ने बीते 10 जनवरी को मासूम को अगवा किया था और 14 जनवरी को उसकी हत्‍या कर दी गई। उसका शव 17 जनवरी को एक जंगल में मिला था। इस मामले में राम, उसके बेटे विशाल और भतीजे (जो नाबालिग बताया जा रहा है) सहित पांच लोगों को नामजद किया गया है। मुस्‍ल‍िम बकरवाल समुदाय की इस बच्‍ची को आरोपियों ने एक छोटे से मंदिर में बंधक बनाकर रखा था, जहां राम कस्‍टोडियन था। इस वारदात को अंजमा देने का मकसद इस समुदाय में डर पैदा करने और उन्‍हें हिन्‍दू बहुल इलाकों से भगाने के लिए किया गया।

पूछताछ के दौरान कठुआ गैंगरेप मामले के मुख्य आरोपी राम ने बताया कि उसे बच्‍ची के साथ ज्‍यादती के बारे में 13 जनवरी को पता चला, जब उसके भतीजे ने इस बारे में अपना जुर्म कबूला। इसी दौरान उसने इसमें अपने चचेरे भाई और राम के बेटे विशाल के शामिल होने के बारे में भी बताया। राम को जब इसमें अपने बेटे के भी शामिल होने का पता चला तो उसने बच्‍ची को जान से मारने का फैसला किया। 13 जनवरी की रात ही वह किशोर, विशाल और उसका एक मित्र परवेश कुमार उर्फ मनु बच्‍ची को मंदिर लेकर गया, जहां एक विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजुरिया ने भी उसके साथ दुष्‍कर्म किया और फिर उसकी हत्‍या कर दी गई।

राम नहीं चाहता था कि इस मामले में जांच की आंच उसके बेटे तक पहुंचे। सबने मिलकर बच्‍ची के शव को हीरानगर कैनाल में फेंकने की साजिश रची, पर इसके लिए उन्‍हें गाड़ी नहीं मिल पाई, जिसके बाद राम का भतीजा, बेटा विशाल, पुलिस अधिकारी खजुरिया और मनु उसके शव को लेकर फिर से मंदिर पहुंच गए। राम खुद पूरी प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए था। उसी ने अगले दिन बच्‍ची के शव को जंगल में फेंकने की सलाह दी। जांचकर्ताओं का यह भी कहना है कि बच्‍ची के अपहरण की साजिश सात जनवरी से ही की जाने लगी थी। आरोपियों ने भांग भी खरीदा और अपहरण के बाद बच्‍ची को इसे देकर उसे नशे में रखा।

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