जिंदगी और मौत के बीच अटका कन्हैया, अब ये हैं उसका आखिरी सहारा

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नई दिल्ली। भूख हड़ताल कर रहे जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें इलाज के लिए एम्स ले जाया गया। वहीं यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से सुनाई गई सजा के खिलाफ भूख हड़ताल कर रहे पांच अन्य छात्रों ने अपनी हड़ताल वापस ले ली है। इससे पहले कन्हैया की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें यूनिवर्सिटी कैम्पस के ही हेल्थ सेंटर ले जाया गया था।

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कन्हैया कुमार

कन्हैया कुमार और उसके साथी 28 अप्रैल से थे भूख हड़ताल पर

खालिद ने कहा कि कन्हैया कुमार को गुरुवार सुबह उलटी होने लगी थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जेएनयूएसयू के अध्यक्ष कन्हैया और जेएनयू के अन्य 19 विद्यार्थी परिसर में नौ फरवरी को हुए बवाल की जांच करने वाली एक उच्च स्तरीय समिति द्वारा उन्हें सुनाई गई सजा के खिलाफ 28 अप्रैल से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे।

खालिद ने कहा कि अन्य विद्यार्थियों का स्वास्थ्य भी तेजी से बिगड़ रहा है। सभी विद्यार्थियों का करीब चार-छह किलोग्राम वजन कम हो गया है। उच्च स्तरीय समिति ने खालिद को भी सजा के तौर पर जेएनयू से एक सेमेस्टर के लिए निलंबित कर दिया है। खालिद ने कहा कि यह अनिश्चिकालीन भूख हड़ताल का आठवां दिन है। जेएनयू प्रशासन अब भी टस से मस नहीं हुआ है।

क्या था मामला

जेएनयू ने उमर खालिद को एक सेमेस्टर और मुजीब गट्टू को 2 सेमेस्टर के लिए निष्कासित किया है। जबिक अनिर्बान भट्टाचार्य पांच साल तक विश्वविद्यालय में कोई कोर्स नहीं कर सकते। इस मामले में जांच के लिए बनाई गई पांच सदस्यीय समिति ने कुछ दिनों पहले अपनी रिपोर्ट सौंपी थी जिसमें कन्हैया सहित 21 छात्रों को दोषी माना गया। जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष आशुतोष, उपाध्यक्ष अनंत, छात्रसंघ के वर्तमान जनरल सेक्रेटरी रामा नागा समेत कुछ और छात्रों का एकेडमिक सस्पेंशन भी तय माना जा रहा था। देशद्रोह के मामले में कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य छह महीने की जमानत पर जेल से बाहर हैं। इन पर देश के खिलाफ नारेबाजी करने का आरोप है।

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