इलाहाबाद: कमिश्नर का गांव ही निकला कुपोषित

malnutrition

इलाहाबाद। देश में जब विकास करने के लिए गांवों को गोद लेने की होड़ लगी तो सभी ने अपने हाथ आगे बढ़ाए। अधिकारी से लेकर जनप्रतिनिधि तक सबने एक एक गांव को गोद ले लिया। गोद लेने के बाद सब भूल गए। उसके बाद कैसा विकास और कौन करेगा विकास यह प्रश्न हर गोद लिये गांव में अपनी मौजूदगी दर्शा रहा है।

कमिश्नर के गांव में कुपोषण
बानगी के तौर पर इलाहाबाद के कमिश्नर राजन शुक्ला के गोद लिए गांव को देखा जा सकता है। कमिश्नर के गांव में ही कुपोषित बच्चे मिले, इस पर कमिश्नर ने लापरवाह अधिकारियों को जमकर फटकार लगायी और बच्चों को दवाएं और पोषण उपलब्ध कराने को कहा।

लाखों रुपये खर्च स्थिति जस की तस
गांव का विकास करने के लिए तमाम योजनाएं बनाई गई कितना विकास हुआ ये तो बाद की बात है लेकिन गांव के बच्चे ही कुपोषित निकल गए। कुपोषण को लेकर इतनी हाय तौबा मची है लाखों रुपये खर्च हुए कमेटियां बनी लेकिन स्थिति जस की तस बनी है। सारी हदें उस वक्त पार हो गई जब इलाहाबाद के कमिश्नर के गोद लिए गांव में ही कुपोषित बच्चे मिले। पोषण मिशन के तहत कमिश्नर ने बहादुर पुर के ब्लॉक को गोद लिया। इसमे से जिस गांव को कमिश्नर ने गोद लिया है वह महज उनके आवास से 25 किलो मीटर के दूरी पर है।

सामने आई हकीकत
कमिश्नर ने गांव में चौपाल लगाई तो हकीकत सामने आयी कमिश्नर ने तुरन्त बच्चों के लिए दवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिये ताकि बच्चें स्वस्थ होकर रेड लाइन से बाहर आ सके।

Related Articles

Leave a Reply

Back to top button