किसानों के चाँद चाचा पर छाए संकट के बादल

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कानपुर। किसानों की पहली पसन्द बन चुकी चाँद छाप यूरिया की निर्माता कम्पनी पर संकट के बादल छाये हुए हैं। कानपुर फर्टिलाइजर एंड सीमेंट कम्पनी प्रति माह 150 करोड़ के घाटे पर चल रही है। इसके पीछे कारण सब्सिडी न मिल पाना है। बीते छह माह में करीब 9 सौ करोड़ का नुकसान हुआ है। इस ब्रॉण्ड को बचाने के लिए अन्य संसाधनो से इसे चलाने के लिए प्रयास कर रहा है। घाटे के चलते 11 सौ कमर्चारियों को समय से वेतन भी नहीं मिल पा रहा है।

कम्पनी

एक बोरी का खर्च और बिक्री

केएफसीएल प्रदेश की सबसे बड़ी रासायनिक खाद निर्माता कम्पनी है। केंद्र द्वारा यूरिया निर्माताओं को 75 फीसदी सब्सिडी दी जाती है। ये 25 फीसदी का खर्च किसानो को खाद बेंचकर निकालते हैं। एक बोरी को तैयार करने में 15 सौ रूपये का खर्च आता है। जबकि किसानों के लिए इसका रेट 250 से 300 ही है।

सरकार से मिलती है सब्सिडी

एक बोरी में करीब 1200 रूपये सरकार से सब्सिडी के तौर पर मिलते हैं। किसानों को खाद उपलब्ध कराने के लिए प्रति माह 175 करोड़ रूपये का खर्च आता है। जिसमे सिर्फ 25 करोड़ ही बिक्री से आते हैं। शेष 150 करोड़ सरकार से सब्सिडी नहीं मिल पाने से घाटा हो रहा है। कम्पनी को गेल से गैस और बाजार से बारदाना उधार लेना पड़ रहा है। वहीं कर्मचारियों का वेतन भी देर से दिया जा रहा है। एके जैन का कहना है कि एक या दो माह ही कम्पनी और चलाई जा सकती है। उम्मीद है कि अप्रैल में सब्सिडी जारी हो सकती है। यदि ऐसा नहीं हुआ तो  संकट पैदा हो जायेगा।

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