करवा चौथ पर इस कथा को सुनने से होगी सौभाग्य की प्राप्ति

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लखनऊ। अपने पति की लम्बी उम्र के लिए करवा चौथ व्रत की परम्परा सदियों से चली आ रही है। कहा जाता है कि हर सुहागिन के लिए करवा चौथ का व्रत सैकड़ों यज्ञ का पुण्य देने वाला होता है। लेकिन इस व्रत को नियम और सावधानी से करना चाहिए। सही विधि से पूजन और व्रत करने से आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस व्रत की पूजा के दौरान व्रत कथा पढ़ने का भी बहुत महत्व है। आज हम इसी कथा के बारे में बताने जा रहें हैं।

करवा चौथ

करवा चौथ का व्रत अगर विधि पूर्वक किया जाए तो सौ गुना फल प्राप्त होता है

 करवा चौथ व्रत की कथा

प्राचीन काल में एक ब्राह्मण था। उसके चार लड़के और एक गुणवती लड़की थी। एक बार लड़की मायके में थी, तब करवा चौथ का व्रत पड़ा। ब्राह्मण की पुत्री ने व्रत को विधिपूर्वक करते हुए पूरे दिन निर्जला व्रत किया। लेकिन उसके भाई अपनी बहन को लेकर काफी परेशान थे उन्हें लग रहा था कि उनकी बहन भूखी और प्यासी होगी। उन्हें पता था कि जबतक चाँद नहीं निकलता तब तक वो जल ग्रहण नहीं करेगी। इसलिए उन्होंने शाम होते ही बहन को बनावटी चंद्रोदय दिखा दिया।  एक भाई पीपल के पेड़ पर छलनी लेकर चढ़ गया और दीपक जलाकर छलनी से रोशनी उत्पन्न कर दी। तभी दूसरे भाई ने नीचे से बहन को आवाज दी- देखो बहन, चंद्रमा निकल आया है, पूजन कर भोजन ग्रहण करो।

बहन ने चांद का अर्घ्य देकर भोजन ग्रहण कर लिया। जैसे ही उसने भोजन ग्रहण किया वैसे ही उसके पति की मौत की खबर मिली। इस बात को सुनकर वह दुखी हो विलाप करने लगी, तभी वहां से रानी इंद्राणी निकल रही थीं। उनसे उसका दुख न देखा गया। ब्राह्मण कन्या ने उनके पैर पकड़ लिए और अपने दुख का कारण पूछा, तब इंद्राणी ने बताया- तूने बिना चंद्र दर्शन करवा चौथ का व्रत तोड़ दिया इसलिए यह कष्ट मिला। अब तुम वर्ष भर की चौथ का व्रत नियमपूर्वक करना तो तेरा पति जीवित हो जाएगा। उसने इंद्राणी के कहे अनुसार चौथ व्रत किया तो पुनः सौभाग्यवती हो गई। इसलिए प्रत्येक स्त्री को अपने पति की दीर्घायु के लिए यह व्रत करना चाहिए।

करवाचौथ की दूसरी कथा के अनुसार

कहते हैं जब पांडव वन-वन भटक रहे थे तो भगवान श्री कृष्ण ने द्रौपदी को इस दिव्य व्रत के बारे बताया था। इसी व्रत के प्रताप से द्रौपदी ने अपने सुहाग की लंबी उम्र का वरदान पाया था। द्रोपदी ने यह व्रत किया और अर्जुन सकुशल मनोवांछित फल प्राप्त कर वापस लौट आए। तभी से सभी महिलाएं अपने पति की लम्बी उम्र और सौभाग्य के लिए ये व्रत करती हैं।

 

 

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