कर्ज के बोझ ने ले ली एक और किसान की जान, क्या यही हैं ‘अच्छे दिन’

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नई दिल्ली। भले ही इस देश के राजनेता को खुद को किसानों का मसीहा बताते हों, लेकिन सच्चाई इससे उलट ही है। एक तरफ पीएम मोदी खुद को किसानों का रखवाला बताते हैं तो दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के सीएम अखिलेश यादव किसानों के हितैषी बनने की बात करते हैं। लेकिन इस देश का किसान आज भी कर्ज के बोझ से उबर नही पाया है। कर्ज का बोझ इतना है कि कुछ न कर पाने की हालत में वो आत्महत्या का रास्ता अपना लेता है। कर्नाटक में एक ऐसे ही एक लाचार किसान ने आत्महत्या कर ली।

कर्ज के बोझ

कर्ज के बोझ और बैंक लोन से था परेशान

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, किसान घर से खेत जाने की बात बोल कर निकला, लेकिन कुछ ही देर बाद उसकी लाश मिली। उसकी मौत का कारण था कर्ज। जिसे वो दिन-रात की मेहनत के बाद भी नहीं चुका पाया। ये दर्दनाक घटना कर्नाटक के हुबली की है, जहां किसान सुबह 5 बजे जाकर बिजली के हाईवॉलटेज टावर पर बैठ गया। खबरों के मुताबिक, हवेरी जिले के रहने वाले 58 वर्षीय चमनसब अर्सिनागुप्पी ने शुक्रवार को यह कदम उठाया। दरअसल, चमनसब की फसल बर्बाद होने के सदमे को बर्दाश्त नहीं कर पाया।उसे मालूम था कि अभी टावर में करंट नहीं है फिर भी दिल पर पत्थर रखकर वो वहां बैठ गया।

बैंक का लोन चुकाने के लिए जमीदारों से लिया पैसा

आत्महत्या के दिन घर वालों ने जब किसान से पूछा कि कहा जा रहे हो, तो बोला कि खेत जा रहा हूं। लेकिन वो टॉवर पर जा कर बैठ गया। वो करीब दो घंटे तक वहां बैठा रहा पर किसी की नजर वहां नहीं गई, लेकिन सुबह 8 बजे लोगों का ध्यान गया कि किसान ने मौत को मुंह लगा लिया। इस सनसनीखेज घटना के बाद वहां लोगों का जमावड़ा लग गया। दरअसल चमनसब ने ज्वार की खेती के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से 3 लाख रुपये का लोन लिया था।

इसके बाद उसने लोन की रकम लौटाने के लिए मनीलॉन्डर्स से मोटी ब्याज दर पर पैसा उधार ले लिया दी जिसका डर था वहीं होना लगा, मनीलॉन्डर्स उसे रोज प्रताड़ित करने लगे। चमनसब की सात बच्चे हैं, जिनमें पांच लड़कियां हैं। चमनसब ने दो लड़कियों की शादी कर दी, लेकिन उसकी जिम्मेदारी का सफर अभी काफी लंबा था।

किसानों के लीडर ने कहा कि मनीलॉन्डर्स ही नहीं चमनसब को बैंक भी लोन चुकाने के लिए दबाव बनाया करते थे। कृषि विभाग की ओर से जारी किए गए आकंड़े में सामने आया कि करीब 77 किसान इसी वजह से खुद को खत्म कर चुके हैं। हैरान करने वाली बात है कि इनमें 56 किसान इसी हवेरी जिले के हैं।

Edited by- Jitendra Nishad

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