राहुल गांधी बनाम वंशवाद की अमरबेल

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कांग्रेस राजघराने में युवराज के राजतिलक का वक्त नजदीक आ गया। रियासत के सिपहसालारों ने राजमाता को बता दिया है कि युवराज अब राजा बनने के लायक हो गए हैं। राजमाता ने भी यही सपना देखा है कि युवराज राजा बनकर जनता के दु:ख दर्द हरे।

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कांग्रेस की नैया क्या पार लगा पाएंगे राहुल गांधी

बात राहुल गांधी की कर रहे कि जिनको अब कांग्रेस की कमान सौंपने की तैयारी हो चुकी है। राहुल गांधी अब 45 साल के हो चुके हैं। राजनीतिक चालों को अब वो बखूबी समझने लगे हैं। ये बात अलग है कि अब तक उनके दांव कुछ दम नहीं दिखा पाए।

राहुल भी चाहते हैं कि अब उनके काम में ज्यादा दखलंदाजी न की जाए। शायद इसीलिए अब वो पूरी पार्टी को अपने हिसाब से फेटना चाहते हैं।

पहली चुनौती उन्हें अगले साल 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में झेलनी पड़ेगी। यूपी में लंबे समय से पार्टी का कोई वजूद नहीं रहा है। 403 विधायकों में पार्टी बड़ी मुश्किल से 25-30 विधायक भेज पाती है। पार्टी की ये स्थिति पिछले चुनाव से नहीं है। ऐसा 1989 से लगातार चल रहा है। यानि लगभग तीस साल से पार्टी यूपी की सत्ता से बाहर है।

राहुल अब पहले यूपी और फिर देश फतेह करना चाहते हैं। इस काम के लिए उन्होंने विशेष चुनाव प्रबंधन टीम में लगा दी है। देखना बस यही होगा कि ग्रास रूट लेवल से कांग्रेस को ये टीम राहुल के नेतृत्व में किस ऊंचाई तक ले जाती है।

अपने परनाना नेहरू की पार्टी को प्रपौत्र राहुल नए पंख लगाना चाहते हैं। हालांकि राहुल को लेकर देशभर में ज्यादा संजीदगी भी नहीं है। आए दिन सोशल मीडिया पर उनका मजाक उड़ना और संसद में सवाल खड़े करते वक्त मुद्दे की गंभीरता से भटक जाना उनकी राजनीतिक सोच पर प्रश्नचिन्ह खड़े करता रहा है।

हाल ही में हुए असम विधानसभा के चुनाव में बदरुद्दीन अजमल के असम यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट से गठबंधन न करने का नुकसान भी राहुल उठा चुके हैं और बंगाल में कम्यूनिस्टों के साथ गंठबंधन का नतीजा भी उन्होंने देखा है।

कांग्रेस पर लग रहे भष्टाचार के आरोप भी उन्हें सहने होंगे। साथ ही नेशनल हेराल्ड केस और अगस्ता वेस्टलैंड में अपने परिवार के दामन पर पड़ रहे छींटों का भी मुकाबला करना होगा।

बीजेपी के कांग्रेस मुक्त नारे के बीच 131 साल पुरानी अपनी पार्टी को पुनर्जीवित करना राहुल गांधी के सामने बड़ी चुनौती होगी। साथ ही उन्हें अपनी ताजपोशी के बाद वंशवाद की अमरबेल सींचने का इल्ज़ाम भी अपने सिर लेना होगा। कुलमिलाकर राहुल गांधी के लिए कांग्रेस अध्यक्ष का ताज कांटों भरा होगा। क्योंकि एक जमाने तक देश पर राज करने वाली पार्टी का राज अब केवल देश के 7 फीसदी लोगों पर रह गया है।

 

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