कांग्रेस के बागी हुए बेकार, भाजपा सरकार बनाने को तैयार

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देहरादून। उत्तराखण्ड विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने की लिखित सूचना उनके पास नहीं पहुंची है। विधानसभा निलंबित होने की जानकारी से भी उन्होंने इनकार किया। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस के बागी नौ विधायकों की सदस्यता खत्म कर दी है। साथ ही कहा है कि कल यानी सोमवार को विधानस भा का सत्र होगा।

कांग्रेस के बागी

राष्ट्रपति शासन पर विधायक के इस पेच के बीच पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने ट्वीट किया है, ‘मैं एक सवाल हर उत्तराखंडी से पूछना चाहूंगा कि क्या ये राज्य अब जनसेवा से, पॉलिसी और प्लानिंग से चलेगा या स्टिंग से?’ हरीश रावत ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार राज्य सरकार को गिराने पर तुली थी। रावत ने यहां संवाददाताओं से कहा, “यह शनिवार को ही स्पष्ट हो गया था। वे उत्तराखंड सरकार तथा राज्य के राज्यपाल को धमका रहे थे।”

कांग्रेस के बागी विधायकों की बगावत

कांग्रेस नेता ने कहा कि फरवरी 2014 में उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार उत्तराखंड में उनकी सरकार गिराना चाहती थी। हालांकि राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद उत्तराखंड विधानसभा को भंग ना करते हुए निलंबित किया गया है. खबरों के मुताबिक राष्ट्रपति शासन को लेकर जल्द ही अधिसूचना भी जारी की जाएगी। वहीं, राज्य में राष्ट्रपति शासन लगने के फैसले का कांग्रेस के बागी विधायकों ने स्वागत किया है। हालांकि सदस्यता खत्म होने पर कांग्रेस के बागी विधायकों ने कुछ नहीं कहा।

उधर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने के बाद रविवार को कहा कि यदि उसे राज्य में सरकार गठन का मौका मिलता है तो वह इसकी संभावनाएं तलाशेगी। भाजपा के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने एक टीवी चैनल से कहा कि उत्तराखंड की समस्या कांग्रेस नेतृत्व व राज्य के इसके नेताओं की देन है। उन्होंने कहा, “यह पार्टी की कमजोरी, नेताओं की निराशा तथा राज्य में बढ़ते भ्रष्टाचार का परिणाम है।”

उन्होंने यह भी कहा कि यदि भाजपा को राज्य में सरकार गठन का अवसर मिलता है तो वह इसकी संभावनाओं तथा विकल्पों की तलाश करेगी। कांग्रेस के बागी विधायकों में से एक राज्य के पूर्व कृषि मंत्री हरक सिंह रावत ने कहा, “यह बात मायने नहीं रखती कि राज्य में अगली सरकार कौन बनाएगा। हम उत्तराखंड के लोगों के लिए केवल सुशासन चाहते हैं।”

उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री आवास भ्रष्टाचार का केंद्र बन गया था और अब राज्य भ्रष्ट सरकार के चंगुल से आजाद है। हम अगली रणनीति बनाएंगे।” उत्तराखंड के अस्तित्व में आने के बाद ऐसा पहली बार हुआ है, जब राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया गया है।

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