यूपी में कांग्रेस अपने पुराने नुस्खों को अजमाने की तैयारी में

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लखनऊ। कांग्रेस एक बार फिर अपने पुराने नुस्खे अजमाने की तैयारी में है। कैसे विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अपने खोए जनाधार को हासिल कर सके। कांग्रेस के पास यूं तो लंबी चौड़ी फौज है पूर्व मंत्रियों की लंबी-चौड़ी फौज और सत्ता संभालने का लंबा अनुभव होने के बावजूद क्षेत्रीय दलों के आगे बेबस हो चुकी कांग्रेस अपने कुछ पुराने नुस्खे फिर आजमाने जा रही है।

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कांग्रेस अब दलित कॉनक्लेव तय करेगी एजेंडा

राजधानी में 18 फरवरी को होने वाले दलित कॉनक्लेव में पार्टी अपने लिए ऐसा एजेंडा तय करने की कोशिश करेगी, जिससे आगामी विधानसभा चुनाव में उसका पूराना रुतबा फिर हासिल हो सके। माल एवेन्यू स्थित प्रदेश मुख्यालय पर होने वाले इस कॉनक्लेव में पार्टी के लगभग 700 दलित नेता हिस्सा लेंगे। यह आयोजन दरअसल पार्टी में दलित नेतृत्व उभारने की एक कवायद भी है। यही वजह है कि इसमें पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी मौजूद रहेंगे। उनकी मौजूदगी के कारण प्रदेश कांग्रेस कमेटी इस आयोजन को दलितों के लिए बड़े राजनीतिक मंच के तौर पर पेश कर रही है।

दलितों को फिर से जोड़ने की तैयारी

पार्टी के राज्यसभा सांसद एवं राष्ट्रीय अनुसूचित जाति जनजाति आयोग के अध्यक्ष पीएल पुनिया और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक भगवती चौधरी इसकी मुख्य जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। पार्टी दलितों को क्षेत्रीय दलों के प्रभाव से मुक्त कराकर फिर से अपने साथ जोड़ना चाहती है। इस आयोजन से पहले दो चरणों में पार्टी भीम ज्योति यात्रा भी निकाल चुकी है। इस यात्रा का मकसद दलितों को और बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के रिश्तों की याद दिलाना था। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. निर्मल खत्री कहते हैं कि राहुल गांधी दलितों के सच्चे रहनुमा हैं। वह पूरे देश में दलितों के सम्मान की लड़ाई लड़ रहे हैं।

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