मुस्लिम महिला ने एक हिंदू औरत के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी

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लखनऊ। यूपी के फतेहपुर जिले की शमशाद बेगम ने जात-पात को किनारे रख कर इंसानियत की मिसाल कायम की है। पुणें की रहनें वाली  आरती की दोनों किडनी ख़राब हो चुकी हैं। शमशाद ने बिना कुछ सोचे अपनी किडनी दान देने का फैसला किया।

 

किडनी दान

किडनी दान कर बनी इंसानियत की मिसाल

शमशाद बेगम कुछ दिन पहले पुणे में रहने वाली अपनी बहन जुनैदा खातून से मिलने पुणे में रहने वाली अपनी बहन जुनैदा खातून से मिलने गई थी। जहां वे अपनी अस्पताल में भर्ती अपनी बहन के सहेली आरती को देखने पहुंची थी।  शमशाद बेगम से आरती का दुख देखा नही गया और उसने आरती को अपनी किडनी दान में देने का फैसला कर लिया। आरती एयरइंडिया में नौकरी करती हैं और काफी बीमार हैं। और उनकी दोनों किडनीयां खराब हो चुकी हैं।

जिंदगी और मौत से जूझ रही आरती की तकलीफ गांव की अनपढ़ महिला शमशाद बेगम से देखा नहीं गया। लंबी बीमारी के बाद अपने पति को खोने वाली शमशाद बेगम ने अस्पताल में ही यह फैसला कर लिया कि वह आरती को नया जीवन देने के लिए अपनी किडनी दान करेंगी।शमशाद बेगम के इस फैसले का जहां उसके पूरे परिवार ने साथ दिया है, वहीं जनपद के अधिकारी भी उसका भरपूर सम्मान कर रहे हैं।

नया जीवन दान देने को तैयार

मुम्बई के हीरा नंदानी अस्पताल में भर्ती आरती को उसके परिवार और रिश्तेदारों ने भी अपनी किडनी देनी चाही थी लेकिन चिकित्सीय परीक्षण के बाद आरती के परिजनों की किडनी उनसे मेल नहीं खा रही थी। लेकिन जब शमशाद बेगम की जांच हुई तो उनका ब्लड मैच कर गया। जिसके बाद वे आरती को नया जीवन दान देने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।

डोनर शमशाद बेगम (40) और रेसिपेंट आरती (38) ने सभी मेडिकल एग्जामिनेशन को पूरा कर लिया है। इतना ही नहीं, बेगम ने जिला स्वास्थ विभाग में किडनी देने के लिए सभी दस्तावेज भी जमा कर दिए हैं। अब इन्तजार है तो राज्य सरकार की ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन कमेटी की ओर से हरी झंडी की।

शमशाद का कहना है कि “मैं किडनी देने के लिए तैयार हूं और किसी भी इन्सान का धर्म इंसानियत होना चाहिए। यह एक इन्सान के लिए महज छोटा सा बलिदान है।” शमशाद ने आरती को डायलिसिस पर देखा।

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