सिर्फ लौकी की खेती के दम पर ये किसान कमाता है लाखों रुपए

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बाराबंकी। यहां के किसान गेहूं, धान और मोटे अनाज की पैदावार को ही अपनी आय का जरिया मान बैठे थे। वहीं, दूसरी तरफ अंबिका प्रसाद नाम के किसान ने इस सोच को पीछे छोड़ अपने जिले का नाम रौशन किया है। दरअसल, इन्होंने अपनी सोच को आगे बढ़ाते हुए आलू, लौकी और टमाटर जैसी फसलों की खेती करनी शुरू की। देखते ही देखते उन्हें लाखों का मुनाफा होने लगा।

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किसान ने अपने जिले का किया नाम रौशन

जिला मुख्यालय से 38 किमी उत्तर दिशा मे फतेहपुर व सूरतगंज के ब्लॉकों के छोटे और मझोले किसानों के लिए आलू और लौकी, टमाटर और लौकी जैसी सह फसली खेती वरदान साबित हो रही है। जायद की अगेती बुवाई के लिए मध्य जनवरी के लगभग लौकी की नर्सरी की जाती है। जिसके लिए मिट्टी को भुरभुरी करके एक मीटर चौड़ी क्यारी जैविक खाद मिला कर तैयार की जाती है नर्सरी लगभग 30 से 35 दिनों में तैयार हो जाती है।

अम्बिका प्रसाद रावत के मुताबिक, नर्सरी तैयार हो जाने पर 10 से 12 फीट पर पक्तियां बनाई जाती है जिसमें पौधे से पौधे की दूरी एक फीट रखी जाती है जिसे टमाटर की खेती में भी आसानी से की जा रही है टमाटर की खेती में लौकी की फसल को झाड़ बना कर उस पर फैला दिया जाता है जिससे दोनों फसलों में अच्छा उत्पादन कम लागत में मिलता है।

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लौकी के अपशिष्ट के इस्तेमाल से बनाते हैं खाद

रामचंद्र मौर्य के मुताबिक, कुछ किसान अक्टूबर में आलू की बुवाई के समय आलू की आठ लाईनों के बाद एक पक्ति उन्नत प्रजाति देशी लौकी की बुवाई करते हैं, जनवरी में आलू की खुदाई कर देते हैं और फरवरी के अंत से लौकी का उत्पादन शुरू हो जाता है यह सह फसली खेती भी किसानों को खूब भा रही है। फसल समाप्त होने पर लौकी की लताओं को हैरो से जुताई करके मिट्टी में मिला देते हैं जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ जाती है।

एक लाख तक का मुनाफा

कस्बा बेलहरा के किसान शोभाराम मौर्य के मुताबिक, लौकी की खेती के लिए एक एकड़ में लगभग 15 से 20 हजार की लागत आती है और एक एकड़ में लगभग 70 से 90 कुन्तल लौकी का उत्पादन हो जाता है बाजारों में भाव अच्छा मिल जाने पर 80 हजार से एक लाख रुपए का शुद्ध आय होने की सम्भावना रहती है।

उन्होंने कहा कि रबी के मौसम में लौकी की खेती जो सितम्बर-अक्टूबर में होती है इसमें केवल हाईब्रेट वीज का प्रयोग किया जाता है जिससे जाड़ों के दिनों में भी अच्छा उत्पादन होता रहता है।

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