केंद्र ने निलंबित आइजी अमिताभ ठाकुर का निलंबन रद किया

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार को केंद्र सरकार की ओर से बड़ा झटका मिला है। केंद्र ने निलंबित आइजी अमिताभ ठाकुर का निलंबन रद कर दिया है। अखिलेश सरकार ने सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव पर धमकी देने का आरोप लगाने पर आइपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को निलंबित किया था। अखिलेश सरकार ने ठाकुर को सर्विस कंडक्ट रूल्स तोड़ने के आरोप था। सरकार ने प्रवक्ता के मुताबिक मनमानी, अनुशासनहीनता, शासन विरोधी दृष्टिकोण, हाईकोर्ट के निर्देशों की अनदेखी, अपने पद से जुड़े दायित्वों और कर्तव्यों के प्रति उदासीनता का दोषी पाया गया था।

अमिताभ ठाकुर का निलंबन रद

अमिताभ ठाकुर को इन 67 दस्तावेजों को देने से क्यों कतरा रही सरकार

आईपीएस अमिताभ ठाकुर को अभिलेख न दिए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई यूपी सरकार की याचिका खारिज कर दी गई है। दरअसल अमिताभ ठाकुर को उनके विभागीय कार्यवाही में 67 अभिलेख दिए जाने के इलाहाबाद हाई कोर्ट के लखनऊ बेंच के आदेश के खिलाफ यूपी सरकार ने सुप्रीमकोर्ट में याचिका की थी। इस पर कोर्ट ने कहा कि कोई भी अफसर जनहित याचिका दायर कर सकता है, चाहे वह सरकार के खिलाफ ही क्यों न हो क्योंकि यह उसका मौलिक अधिकार है।

अमिताभ ठाकुर ने आरोपपत्र के दस्तावेजों के लिए हाईकोर्ट में दी थी अर्जी

अमिताभ ने हाईकोर्ट में प्रार्थना की थी कि जब सरकार ने इन अभिलेखों के आधार पर आरोपपत्र तैयार किया है तो उन्हें ये अभिलेख अवश्य ही प्रदान किये जाने चाहिए, जिस पर हाई कोर्ट ने 13 जनवरी 2016 को सरकार को उत्तर प्रदेश सरकार को चार सप्ताह में अभिलेख देने और तब तक विभागीय जांच स्थगित करने के भी आदेश दिए। राज्य सरकार ने इसका पालन नहीं कर इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की जिसमे राज्य सरकार की ओर से यह कहा गया कि अमिताभ हर 15 दिन पर सरकार के खिलाफ जनहित याचिका दायर करते रहते हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि कोई भी अफसर जनहित याचिका दायर कर सकता है, चाहे वह सरकार के खिलाफ ही क्यों न हो क्योंकि यह उसका मौलिक अधिकार है।

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