केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को दिया जवाब, कहा- मौत की सजा के लिए सबसे बेहतर तरीका है फांसी

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सजा-ए-मौत के लिए फांसी को ही सबसे बेहतर विकल्प बताया है। मोदी सरकार ने यह बात मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किये हलफनामे में कही। सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को मौत की सजा में बदलाव के लिए दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने हलफनामे के माध्यम से कहा कि लीथल इंजेक्शन के जरिए मौत की सजा फांसी की तुलना में ज्यादा नृशंस है। इस लिए मौत की सजा के लिए फांसी ही बेहतर विकल्‍प है।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में मौत की सजा में बदलाव करने के लिए एक याचिका दायर हुई थी, जिसपर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से जवाब मांगा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार से पूछा था कि क्या मौत की सजा में फांसी के अलावा कोई ऐसा वैकल्पिक तरीका हो सकता है जिसमें अपराधी की मौत शांतिपूर्वक हो और उसे ज्यादा दर्द न झेलना पड़े। पिछली सुनवाई के दौरान केंद्र से प्रश्न पूछते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि सदियों से ये कहा जाता रहा है कि पेनलेस डेथ की कोई बराबरी नहीं। ऐसे में विज्ञान में आई तेजी के चलते मौत के दूसरे तरीके को तलाशा जाए।

इसके जवाब में केंद्र सरकार की ओर से एक हलफनामा दाखिल किया गया है जिसमें केंद्र सरकार ने कहा कि फांसी की सजा, मौत की सजा के लिए जल्दी और सुरक्षित तरीका है। लीथल इंजेक्शन और फायरिंग के जरिए मौत की सज़ा देना अमानवीय और नृशंस है। केंद्र सरकार ने ये भी कहा कि फांसी की सजा केवल रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस में दी जाती है। लिहाजा फांसी की सजा बेहतर है।

आपको बता दें कि मौत की सजा में बदलाव की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि मौत की सजा में फांसी के अलावा किसी दूसरे विकल्प को अपनाया जाना चाहिए। इस याचिया में फांसी को मौत का सबसे दर्दनाक और बर्बर तरीका बताया गया है और इसकी जगह जहर का इंजेक्शन लगाने, गोली मारने, गैस चैंबर या बिजली के झटके देने जैसी सजा देने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है फांसी से मौत में 40 मिनट तक लगते हैं, जबकि गोली मारने और इलेक्ट्रिक चेयर पर केवल कुछ मिनट में मौत हो जाती है।

Related Articles