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भारत पर 4000 करोड़ का दावा ठोंकेगी यह कंपनी

ब्रिटेन की पेट्रोलियम कंपनी केर्न ने भारत से 4000 हजार करोड़ रुपए की क्षतिपूर्ति मांगने का फैसला लिया है। यह क्षतिपूर्ति आठ साल पुराने आंतरिक कारोबार पुनर्गठन (इंटरनल बिजनेस रीस्‍ट्रक्‍चरिंग) के मामले में मांगी जाएगी। भारत की ओर से केर्न इंडिया से 10,247 करोड़ रुपए टैक्‍स मांगने की वजह से कंपनी के शेयरों की कीमत में भारी गिरावट आई थी। इसी नुकसान के एवज में कंपनी भारत के खिलाफ यह दावा ठोंकने की तैयारी में है।

केर्न इंडिया

केर्न इंडिया का दावा

इनकम टैक्‍स विभाग ने पिछली तारीख से लागू एक कानून का इस्‍तेमाल करते हुए जनवरी, 2014 में केर्न एनर्जी के खिलाफ टैक्‍स असेसमेंट संबंधी आदेश का मसौदा जारी किया था। साथ ही ब्रिटेन में इस कंपनी को केर्न इंडिया में अपनी 9.8 फीसदी हिस्‍सेदारी बेचने से भी रोक दिया था। इसके बाद केर्न ने कहा था कि ब्रिटेन-भारत निवेश संधि के मुताबिक भारत के इनकम टैक्‍स विभाग के फैसले के खिलाफ आर्बिटेशन अवार्ड (मध्‍यस्‍थता) की प्रक्रिया शुरू की गई है।

केर्न एनर्जी के सीईओ साइमन थॉमस ने कहा है कि पुराने टैक्‍स मामले में मध्‍यस्‍थता की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। केर्न और भारत सरकार के बीच तीन अंतरराष्‍ट्रीय पंचों की नियुक्ति पर सहमति बन गई है। यह सहमति ब्रिटेन-भारत निवेश संधि के तहत बनी है।

पिछले साल केर्न इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चौखट तक गया था। इस पेट्रोलियम कंपनी ने रेट्रोस्‍पेक्टिव टैक्‍स यानी पिछली तारीख से लगने वाले टैक्‍स पर मोदी को पत्र लिखकर तस्‍वीर साफ करने की मांग की थी।

दरअसल, प्रधानमंत्री ने कहा था कि उनकी सरकार रेट्रोस्‍पेक्टिव टैक्‍स नहीं लगाएगी। इसका हवाला देते हुए केर्न ने मोदी को पत्र लिखा था। इसमें मोदी को लंदन में दिए अपने बयान की याद दिलाई गई थी। बताया गया था कि भारत के साथ केर्न का टैक्‍स का मामला सुलझा नहीं है। केर्न को एक अरब डॉलर का घाटा हो चुका है। लेकिन ठीक से सुनवाई नहीं होने पर अब केर्न ने क्षतिपूर्ति का दावा ठोंकने का मन बना लिया है।

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